नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों ऐसे परिचालन संकट से गुजर रही है, जिसने न केवल हजारों यात्रियों की यात्राएँ बाधित कीं, बल्कि पूरे भारतीय एविएशन सिस्टम को हिला कर रख दिया है। पिछले 48 घंटों में जहां 200 से अधिक उड़ानें रद्द हो गईं, वहीं पिछले एक महीने में कंपनी कुल 1400 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल कर चुकी है। इस स्थिति ने एयरपोर्ट्स पर भारी भीड़, गुस्सा और अव्यवस्था की तस्वीरें पैदा कर दी हैं।
एयरपोर्ट्स पर लंबी कतारें, यात्रियों का फूटा गुस्सा
बुधवार सुबह दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ नियंत्रण से बाहर दिखाई दी। लोग घंटों कतारों में खड़े रहे, कई यात्रियों को उड़ान रद्द होने की जानकारी अंतिम समय पर मिली।सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आए जिनमें लोग कह रहे थे कि “काउंटर पर दो कर्मचारी, और कतार में सैकड़ों लोग!” इंडिगो की “सबसे भरोसेमंद” एयरलाइन वाली इमेज पर भी सवाल उठने लगे।
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एक महीने से जमा हो रहा संकट अब फूटा
दिखने में अचानक लगने वाली यह गड़बड़ी दरअसल पिछले 30 दिनों से धीरे-धीरे बढ़ रही थी।नवंबर में 1200 से अधिक उड़ानें रद्द, और दिसंबर के पहले हफ्ते में ही 400 कैंसिलेशन ने यात्रियों के असंतोष को बढ़ा दिया। यह संकट कई कारणों के मेल से पैदा हुआ।
क्रू की कमी: DGCA के नए नियमों का बड़ा असर
1 नवंबर से DGCA ने पायलटों और क्रू के आराम समय से जुड़े नए नियम लागू किए।
इन नियमों के बाद:
- पायलट कम घंटे उड़ान भर सकते हैं
- रात की उड़ानों पर सीमाएं बढ़ीं
- क्रू को अधिक विश्राम अवधि देनी अनिवार्य हुई
इंडिगो का रोस्टर, जो मिनट-बेस्ड सटीकता पर चलता है, अचानक बिखर गया।स्थिति यह हो गई कि विमान मौजूद थे, लेकिन उड़ाने के लिए पर्याप्त क्रू नहीं।
तकनीकी दिक्कत और मौसम ने भी बढ़ाया दबाव
दिल्ली और पुणे एयरपोर्ट पर चेक-इन सिस्टम फेल होने से पूरा नेटवर्क प्रभावित हुआ।सर्दियों की शुरुआत और बढ़ते यात्रियों की संख्या ने देरी का सिलसिला और लंबा कर दिया।
क्यों बाकी एयरलाइंस उतना प्रभावित नहीं हुईं?
एयर इंडिया, विस्तारा और अकासा की उड़ान संख्या और नाइट शेड्यूल इंडिगो से कम हैं।इंडिगो का “अत्यधिक उपयोग” वाला मॉडल सामान्य दिनों में शानदार काम करता है, लेकिन बदलाव की स्थिति में सबसे ज्यादा दबाव झेलता है।
DGCA की नज़र और इंडिगो की प्रतिक्रिया
DGCA ने इंडिगो से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।कंपनी दावा कर रही है कि वह शेड्यूल को “रीबैलेंस” कर रही है, नाइट उड़ानें घटा रही है और क्रू तैनाती बढ़ा रही है।हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थिति को पूरी तरह स्थिर होने में कई सप्ताह लग सकते हैं।











