निशानेबाज न्यूज़ डेस्क: भारत और ईरान के बीच हुई उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत का सकारात्मक असर सामने आया है। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच वार्ता के बाद ईरान ने भारत-झंडाधारी तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय तनाव के कारण कई देशों के जहाजों को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने में गंभीर खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
वार्ता के बाद सुरक्षित निकले भारतीय टैंकर
कूटनीतिक सहमति के तुरंत बाद ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ नामक दो भारतीय टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरते हुए देखे गए।यह घटना इस बात का संकेत है कि भारत और ईरान के बीच हुई बातचीत का सीधा असर समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है।
Read More : Raipur News: रायपुर पुलिस का ड्रंक एंड ड्राइव अभियान: जनवरी से अब तक 949 नशेड़ी चालकों पर कार्रवाई
होर्मुज में बढ़ते हमलों के बीच राहत
पिछले कुछ समय से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं बढ़ गई थीं। कई विदेशी जहाज इन हमलों का निशाना बने, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ गया।ऐसे माहौल में भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिलना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
रणनीतिक महत्व रखता है होर्मुज जलडमरूमध्य
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण किसी भी देश को वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव डालने की क्षमता देता है।
अमेरिका और सहयोगी देशों पर प्रतिबंध
ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों से जुड़े जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।ईरान के बयान के अनुसार, वह अपने विरोधी देशों के लिए तेल आपूर्ति को रोकने के लिए इस रणनीतिक मार्ग का इस्तेमाल कर सकता है।
भारत को मिली विशेष छूट
ईरान द्वारा भारत को दी गई यह विशेष अनुमति दर्शाती है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और ऊर्जा सहयोग मजबूत बना हुआ है।विशेषज्ञों का मानना है कि संकट के समय कूटनीति और संवाद ही अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थिरता बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका साबित होते हैं।











