मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी, संसद में सियासी घमासान

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क। संसद का बजट सत्र इन दिनों तीखे राजनीतिक टकराव का केंद्र बनता जा रहा है। एक तरफ केंद्र सरकार अपने बजट और नीतियों को आगे बढ़ाने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है। इसी कड़ी में अब विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव को लेकर व्यापक तैयारी कर ली है और इसे जल्द ही संसद में पेश किया जा सकता है।

180 सांसदों के हस्ताक्षर का दावा

सूत्रों के मुताबिक इंडिया गठबंधन के कई दलों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। बताया जा रहा है कि महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर अब तक करीब 180 सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं।

इनमें लोकसभा के लगभग 120 सांसद और राज्यसभा के करीब 60 सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि विपक्ष 12 या 13 मार्च को इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से संसद में पेश कर सकता है।

बंगाल की वोटर लिस्ट विवाद बना मुख्य मुद्दा

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की नाराजगी का केंद्र पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) का मुद्दा बताया जा रहा है।

तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया के नाम पर बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग से कई बार बातचीत की गई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

इसके अलावा विपक्ष ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण रहा है, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

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महाभियोग की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया वही है जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को हटाने के लिए लागू होती है।

इसके लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाना पड़ता है और “सिद्ध कदाचार या अक्षमता” के आधार पर ही किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है।

यदि यह प्रस्ताव संसद में पेश होता है तो यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार होगा जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू होगी।

संख्या बल से ज्यादा राजनीतिक संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में संख्या बल के लिहाज से केंद्र सरकार मजबूत स्थिति में है, इसलिए इस प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है।

इसके बावजूद विपक्ष इस कदम के जरिए संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता का मुद्दा उठाकर राजनीतिक संदेश देना चाहता है।

स्पीकर के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव

संसद में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है।

बताया जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं मिलने के बाद विपक्ष ने यह कदम उठाया। इस मुद्दे को लेकर संसद के भीतर सियासी माहौल और भी गर्म हो गया है।

कुल मिलाकर, बजट सत्र के दौरान संसद में जारी यह राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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