Thursday, August 27, 2026
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मौनी अमावस्या पर बड़ा विवाद! संगम जाने से रोके गए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, शिष्यों से धक्का-मुक्की, देखें Video

प्रयागराज : मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर प्रयागराज संगम तट पर उस वक्त विवाद खड़ा हो गया, जब ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। यह घटना मेला क्षेत्र में उस समय हुई, जब शंकराचार्य अपने शिष्यों और समर्थकों के साथ गंगा स्नान के लिए जा रहे थे।
रथ रोके जाने के बाद स्थिति तेजी से तनावपूर्ण हो गई और पुलिस व श्रद्धालुओं के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालांकि पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए हालात को काबू में कर लिया, लेकिन इस घटना के बाद संत समाज में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

शंकराचार्य ने स्नान से किया इनकार

विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गंगा स्नान करने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके शिष्यों के साथ मारपीट और बदसलूकी की।शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें और उनके अनुयायियों को संगम तट पर जाने से रोका गया, जिससे वे आहत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यवहार के चलते वह बिना स्नान किए ही वापस लौट रहे हैं।

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नो-व्हीकल जोन बना विवाद की वजह

प्रशासन की ओर से मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला क्षेत्र को ‘नो-व्हीकल जोन’ घोषित किया गया है। इसके तहत किसी भी वाहन या काफिले को संगम तट की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
इसी नियम के तहत शंकराचार्य के रथ को भी रोक दिया गया, जिसके बाद उनके समर्थकों ने नाराजगी जताई और विवाद की स्थिति बन गई।

पुलिस-श्रद्धालुओं के बीच हुई धक्का-मुक्की

रथ को रोकते ही बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालु एकत्र हो गए। देखते ही देखते पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त बल तैनात किया गया और स्थिति पर नियंत्रण पाया गया।

प्रशासन ने क्या दी सफाई

मंडल आयुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि शंकराचार्य ने पैदल संगम जाने का अनुरोध किया था, लेकिन उनके साथ बड़ी संख्या में अनुयायी थे। ऐसे में भीड़ बेकाबू हो सकती थी और भगदड़ का खतरा पैदा हो जाता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना पूर्व अनुमति किसी भी रथ या वाहन को आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती। प्रशासन की प्राथमिकता सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा है और किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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