Saturday, September 19, 2026
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मिडिल ईस्ट तनाव की बीच ट्रंप भारत पर फिर गिराएंगे ‘टैरिफ बम’! भारत और चीन सहित कई देशों की नीतियों की जांच

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने भारत सहित दुनिया के 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की व्यापारिक नीतियों और प्रथाओं की नई जांच शुरू कर दी है। अमेरिका का मानना है कि इन देशों की कुछ व्यापारिक नीतियां “अनुचित” हैं, जिससे अमेरिकी उद्योग और नौकरियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इस कदम के बाद भारत, चीन, यूरोपीय संघ और जापान जैसे बड़े देशों पर अतिरिक्त टैरिफ या अन्य आर्थिक दंड लगाए जाने की संभावना बढ़ गई है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नया कदम

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पहले लगाए गए कुछ टैरिफ को खारिज कर दिया थाइसके बाद ट्रंप प्रशासन नए कानूनी विकल्पों के तहत व्यापारिक नीतियों की जांच शुरू कर रहा है।

इस जांच का मुख्य उद्देश्य अत्यधिक औद्योगिक उत्पादन क्षमता और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं की पहचान करना बताया जा रहा है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का सख्त बयान

समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने बताया कि प्रशासन ने दो अलग-अलग जांच शुरू की हैं।

पहली जांच अत्यधिक औद्योगिक उत्पादन क्षमता पर केंद्रित है, जबकि दूसरी जांच जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को लेकर की जा रही है।

ग्रीर ने संकेत दिया कि इस साल गर्मियों तक चीन, भारत, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और मेक्सिको जैसे देशों पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं।

कई एशियाई और यूरोपीय देश भी जांच के दायरे में

इस जांच में ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे जैसे देश भी शामिल हैं। हालांकि कनाडा को इस सूची से बाहर रखा गया है, जबकि वह अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से वैश्विक व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर पड़ सकता है।

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चीन की इलेक्ट्रिक वाहन क्षमता पर उठे सवाल

अमेरिकी अधिकारियों ने खासतौर पर चीन की इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन क्षमता पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि चीन का उत्पादन उसकी घरेलू मांग से कहीं अधिक है और चीनी कंपनियां दुनिया के कई देशों में अपने कारखाने स्थापित कर रही हैं।

उदाहरण के तौर पर चीनी कंपनी BYD उज्बेकिस्तान, थाईलैंड, ब्राजील, हंगरी और तुर्की में अपने उत्पादन केंद्र स्थापित कर रही है और यूरोप में भी विस्तार की योजना बना रही है।

जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर भी नजर

ट्रंप प्रशासन की दूसरी जांच जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात पर केंद्रित है। यह जांच करीब 60 व्यापारिक साझेदार देशों को प्रभावित कर सकती है और इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।

अमेरिका पहले ही उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले कुछ उत्पादों पर कार्रवाई कर चुका है।

ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से पहले रणनीतिक कदम

यह जांच रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अप्रैल में बीजिंग में डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात होने वाली है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस नई जांच का असर दोनों देशों के बीच होने वाली आगामी वार्ता और वैश्विक व्यापार संतुलन पर भी पड़ सकता है।

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