नई दिल्ली: पड़ोसी देश बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद हालात लगातार अस्थिर बने हुए हैं। हिंसा और अराजकता के इस माहौल को देखते हुए भारत ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश की जेलों से कई खूंखार आतंकी और अपराधी रिहा हो चुके हैं, जो भारत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
सीमा पर सेना के शीर्ष अधिकारियों का दौरा
ऐसे संवेदनशील समय में भारतीय सेना के ईस्टर्न कमांड के प्रमुख का पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्रों का दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने मिजोरम के परवा और दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया जैसे सीमावर्ती इलाकों का निरीक्षण किया, जहां असम राइफल्स और बीएसएफ के जवान मुस्तैदी से तैनात हैं।
लंबी और चुनौतीपूर्ण सीमाएं
पूर्वोत्तर भारत की बांग्लादेश से लगने वाली सीमा करीब 1,880 किलोमीटर लंबी और बेहद जटिल है। त्रिपुरा की 856 किमी, मेघालय की 443 किमी, मिजोरम की 318 किमी और असम की 263 किमी सीमा बांग्लादेश से जुड़ी हुई है। इतनी लंबी सीमा पर घुसपैठ, तस्करी और अपराधों को रोकना बड़ी चुनौती है, जिसे सुरक्षा बल बखूबी निभा रहे हैं।
जेलों से छूटे आतंकी चिंता का कारण
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा अराजक स्थिति में रिहा हुए आतंकी भारत में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। राज्य सरकार लगातार केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट को जमीनी हालात से अवगत करा रही है।
आधुनिक तकनीक से निगरानी
सीमा की सुरक्षा के लिए ड्रोन, अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली और S-400 मोबाइल लॉन्ग रेंज मिसाइल सिस्टम जैसे आधुनिक हथियार तैनात किए गए हैं। दुर्गम इलाकों में ड्रोन से 24×7 निगरानी रखी जा रही है। सेना के कमांडर ने जवानों की सतर्कता और तैयारियों की सराहना की।
हर परिस्थिति से निपटने को तैयार भारत
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने स्पष्ट कहा कि भारत सरकार और सेना हर हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस दौरे का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सीमा पार से किसी भी अप्रिय घटना का जवाब तुरंत और प्रभावी ढंग से दिया जा सके।













