Dussehra 2025 : दशहरा या विजयादशमी हिन्दू धर्म का प्रमुख पर्व है, जिसे हर साल आश्विन मास की दसवीं तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसी दिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नीलकंठ देखना शुभ माना जाता है।
Dussehra 2025 : नीलकंठ का धार्मिक महत्व:
नीलकंठ भगवान शिव का दूसरा नाम है। पुराणों में वर्णन है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष (कालकूट) से पूरे ब्रह्मांड को खतरा था। भगवान शिव ने यह विष अपने गले में समेट लिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए।
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दशहरा और नीलकंठ का संबंध:
दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। जैसे भगवान राम ने रावण का वध किया, वैसे ही भगवान शिव ने विष को अपने शरीर में समेटकर संसार को बचाया।
दशहरा के दिन नीलकंठ देखना शुभ माना जाता है क्योंकि यह संकट में साहस और धैर्य का प्रतीक है।
नीलकंठ को देखने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
कैसे करें पूजा और दर्शन:
लोग सुबह जल्दी उठकर भगवान शिव के मंदिर जाकर नीलकंठ का दर्शन करते हैं।
भक्त इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र चढ़ाकर पूजा करते हैं।
नीलकंठ देखने के साथ-साथ उपवास रखना और शिव मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
शुभ संकेत:
नीलकंठ देखना और उसकी पूजा करने से जीवन में कठिनाइयों का समाधान होता है। यह हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और साहस बनाए रखना चाहिए।









