Bageshwar Dham Sarkar: नई दिल्ली। अपनी अलौकिक महिमा और देश-विदेश में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र बागेश्वर धाम सरकार (पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री) ने एक बार फिर अपने सरल और प्रेरणादायी आचरण से जनसामान्य का दिल जीत लिया है। उत्तराखंड के पावन तीर्थ बद्रीनाथ धाम में अपनी विशेष साधना पूर्ण करने के पश्चात, उन्होंने वापस बागेश्वर धाम लौटने के लिए किसी निजी विमान, हेलीकॉप्टर या लग्जरी वीआईपी कारों के काफिले के बजाय भारतीय रेल (ट्रेन) को चुना। दिल्ली से झांसी तक आम यात्रियों के बीच ट्रेन में सफर कर उन्होंने देशवासियों को एक बेहद सकारात्मक और बड़ा संदेश दिया है।
बद्रीनाथ साधना और कथा के बाद दिल्ली आगमन जानकारी के अनुसार, बागेश्वर धाम सरकार ने बद्रीनाथ धाम में अपनी एक दिवसीय गुप्त साधना और पांच दिवसीय श्री सत्यनारायण भगवान की संगीतमय कथा को सफलतापूर्वक संपन्न किया। इसके बाद वे सड़क मार्ग से होते हुए पहले देहरादून पहुंचे और वहां से देश की राजधानी दिल्ली आए। दिल्ली से अपने मुख्यालय (बागेश्वर धाम) की ओर प्रस्थान करने के लिए उनके पास तमाम वीआईपी और विशेष साधन उपलब्ध थे, परंतु उन्होंने समाज में एक नई चेतना जगाने के उद्देश्य से रेल मार्ग से यात्रा करने का निर्णय लिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का किया व्यावहारिक समर्थन इस अनूठी यात्रा के पीछे का मुख्य उद्देश्य देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम दिए गए एक विशेष संदेश को गति देना है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से यातायात व्यवस्था को सुढ़ृढ़ करने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘सार्वजनिक परिवहन’ (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) का अधिकाधिक उपयोग करने का आह्वान किया था। बागेश्वर सरकार ने न केवल इस संदेश की सराहना की, बल्कि स्वयं आम यात्रियों के साथ साधारण ढंग से ट्रेन में सफर करके इस संदेश को अपने व्यवहार में भी उतारा।
ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की अपील ट्रेन
यात्रा के दौरान बागेश्वर सरकार ने पूर्व में श्रद्धालुओं से की गई अपनी अपीलों को दोहराया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति, ईंधन की बचत, यातायात के दबाव को कम करने और प्रकृति को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए हम सभी को सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देनी चाहिए। वीआईपी साधनों को छोड़कर आम जनता के बीच बैठकर यात्रा करने के उनके इस कदम की रेलवे स्टाफ सहित ट्रेन में मौजूद सहयात्रियों ने जमकर सराहना की। सोशल मीडिया और धार्मिक गलियारों में बागेश्वर सरकार की इस सादगी और पर्यावरण-अनुकूल पहल की खूब चर्चा हो रही है।









