Copper Aluminium Rates : नई दिल्ली: अगर आप नए साल में एयर कंडीशनर (AC), फ्रिज या रसोई के नए बर्तन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। इंडस्ट्रियल मेटल के वैश्विक बाजार में आए उछाल के कारण दिग्गज कंपनियों ने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम? (प्रमुख कारण)
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एल्युमीनियम का संकट: तीन साल में पहली बार एल्युमीनियम 3,000 डॉलर प्रति टन के पार चला गया है। चीन में उत्पादन पर प्रतिबंध और यूरोप में बिजली की बढ़ती लागत इसकी मुख्य वजह है।
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तांबे (Copper) में ‘करंट’: तांबा 12,000 डॉलर प्रति टन के ऐतिहासिक स्तर को छू रहा है। चिली और इंडोनेशिया जैसे बड़े उत्पादक देशों में खनन बाधाओं ने सप्लाई चेन को तोड़ दिया है।
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निकेल और अन्य धातुएं: इंडोनेशिया द्वारा निकेल उत्पादन में कटौती की योजना से इसकी कीमतों में भी आग लगी हुई है।
आपके बजट पर क्या होगा असर?
टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं (Consumer Durables) बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की लागत बढ़ने से वे अपना मुनाफा बचाने के लिए कीमतों में 5% से 8% तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं।
इन चीजों के बढ़ेंगे दाम:
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रसोई के उपकरण: प्रेशर कुकर, कढ़ाई और अन्य एल्युमीनियम व तांबे के बर्तन।
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इलेक्ट्रॉनिक गुड्स: एयर कंडीशनर (AC), रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन (इनमें कॉपर वाइंडिंग और एल्युमीनियम फिन्स का इस्तेमाल होता है)।
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बाथरूम फिटिंग: तांबे और पीतल से बने नल और अन्य फिटिंग्स।
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इलेक्ट्रिक वायर: तांबे के तार और केबल्स।
दिग्गज इन्वेस्टमेंट फर्म गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, वैश्विक निवेश और नीतिगत बदलावों के कारण औद्योगिक धातुओं की कीमतें 2026 की पहली छमाही तक ऊंची बनी रहेंगी। डॉलर की कमजोरी और चीन की आर्थिक रिकवरी की उम्मीदों ने भी इन कीमतों को हवा दी है।













