Constable Lokayukta team dodges : टीकमगढ़। टीकमगढ़ शहर में देर रात एक फिल्मी ड्रामा देखने को मिला, जहाँ रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने से बचने के लिए कोतवाली थाने में पदस्थ एक आरक्षक लोकायुक्त टीम को चकमा देकर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भाग निकला। इस दौरान लोकायुक्त टीम ने उसका पीछा किया, लेकिन वह पकड़ में नहीं आया।
दरअसल, यह पूरा मामला कोतवाली टीकमगढ़ से जुड़ा है, जहाँ कोतवाली टीआई ब्रजेंद्र चचोदिया द्वारा आरक्षक पंकज यादव के माध्यम से एक व्यक्ति से जमानत कराने के ऐवज में ₹20,000 की रिश्वत की मांग की गई थी।

रिश्वत की दूसरी किस्त लेने पहुंचा था आरक्षक
आवेदक अंकित तिवारी ने पुलिस द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत पहले ही एसपी लोकायुक्त सागर से कर दी थी, जिसकी पुष्टि लोकायुक्त टीम ने अपने स्तर पर कर ली थी। आवेदक ने ₹8,000 पहले ही आरक्षक को दे दिए थे, और शेष बचे ₹12,000 कल (देर रात) देना तय हुआ था।
लोकायुक्त पुलिस सागर की टीम ने आरक्षक को रिश्वत की शेष राशि लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने की पूरी तैयारी कर ली थी। आवेदक अंकित तिवारी ने आरक्षक को पैसे लेने के लिए कलेक्ट्रेट के सामने नीलकमल होटल के सामने बुलाया था, जहाँ पहले से लोकायुक्त की टीम मौजूद थी।
धक्का-मुक्की कर भागा आरोपी
कार से पहुंचे आरक्षक पंकज यादव ने जैसे ही आवेदक से रिश्वत के पैसे लेकर अपनी जैकेट में रखे, वैसे ही लोकायुक्त पुलिस की टीम ने उसे चारों ओर से घेर लिया। लेकिन रिश्वतखोर आरक्षक पंकज यादव लोकायुक्त पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की कर मौके से अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला।
आरक्षक का पीछा कर रही लोकायुक्त टीम ने उसे काफी तलाशा, लेकिन वह नहीं मिला। हालांकि, आरक्षक को पकड़ने के दौरान उसकी जैकेट लोकायुक्त पुलिस कर्मियों के हाथों में आ गई थी, जिसमें रिश्वत के पैसे रखे हुए थे। उसकी कार भी मौके से जब्त कर ली गई है।
लोकायुक्त पुलिस सागर द्वारा इस मामले में कोतवाली टीआई ब्रजेंद्र चचोदिया और आरक्षक पंकज यादव के विरुद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।













