Sunday, September 27, 2026
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लौट आयी महामारी! कोरोना के बाद अब चीन में ‘नोरोवायरस’ का कहर, 100 से ज्यादा बच्चे बीमार

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  चीन के ग्वांगडोंग प्रांत के फोशान शहर से एक बड़ी स्वास्थ्य से जुड़ी खबर सामने आई है। यहां स्थित शिंगहुई मिडिल स्कूल में नोरोवायरस संक्रमण का बड़ा मामला दर्ज किया गया है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, स्कूल के 103 छात्र नोरोवायरस से संक्रमित पाए गए हैं।हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी छात्र की हालत गंभीर नहीं बताई गई है और न ही किसी की मौत हुई है।

संक्रमण के बाद तुरंत उठाए गए एहतियाती कदम

मामले के सामने आते ही स्कूल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया। पूरे स्कूल परिसर को तुरंत सैनिटाइज किया गया है। संक्रमित छात्रों को आइसोलेशन में रखा गया है और उनकी नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल के अन्य छात्रों और स्टाफ को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है।

क्या है नोरोवायरस? जानिए इसके लक्षण

नोरोवायरस वायरसों का एक समूह है, जो गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का संक्रमण) पैदा करता है। इसे आम भाषा में ‘स्टमक फ्लू’ भी कहा जाता है।
इसके प्रमुख लक्षणों में—

  • तेज उल्टी

  • बार-बार दस्त

  • पेट दर्द

  • कमजोरी और डिहाइड्रेशन

शामिल हैं। यह वायरस बेहद संक्रामक होता है और दूषित भोजन, पानी या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से तेजी से फैलता है।

ग्वांगडोंग में क्यों ज्यादा फैलता है यह वायरस

ग्वांगडोंग प्रांत के रोग नियंत्रण विभाग के अनुसार, यहां अक्टूबर से मार्च के बीच नोरोवायरस के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। इस मौसम में ठंड और नमी वायरस के फैलने के लिए अनुकूल मानी जाती है।

दुनियाभर में नोरोवायरस का खतरनाक आंकड़ा

नोरोवायरस वैश्विक स्तर पर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक—

  • हर साल 68.5 करोड़ लोग इससे संक्रमित होते हैं

  • इनमें 5 साल से कम उम्र के 20 करोड़ बच्चे शामिल होते हैं

  • सालाना करीब 2 लाख मौतें होती हैं

  • इनमें से लगभग 50 हजार मौतें बच्चों की होती हैं

इस बीमारी के इलाज और आर्थिक नुकसान के कारण दुनिया को हर साल करीब 60 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ता है।

1968 में आया था पहला बड़ा मामला

नोरोवायरस का पहला बड़ा प्रकोप 1968 में अमेरिका के ओहायो राज्य के नॉरवॉक शहर में सामने आया था। शुरुआत में इसे ‘नॉरवॉक वायरस’ कहा गया, लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर नोरोवायरस कर दिया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तरी गोलार्ध में यह वायरस नवंबर से अप्रैल, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में अप्रैल से सितंबर के बीच ज्यादा सक्रिय रहता है। भूमध्य रेखा के पास स्थित देशों में यह सालभर फैल सकता है।
चीन में मौजूदा स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार सर्वे और जांच कर रही हैं।

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