मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सामने आए बहुचर्चित जहरीले कफ सिरप कांड में गिरफ्तार चारों आरोपियों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है।मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर की एकलपीठ ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सभी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। यह फैसला 2 फरवरी 2026 को सुरक्षित रखने के बाद न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल ने सुनाया।
30 मासूम बच्चों की मौत से दहला था इलाका
मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब तमिलनाडु स्थित एक फार्मा कंपनी द्वारा निर्मित कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन के बाद छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में करीब 30 बच्चों की मौत हो गई थी।बताया गया कि सर्दी-जुकाम से पीड़ित बच्चों को यह सिरप चिकित्सकीय परामर्श पर दिया गया था, जिसके बाद उनकी किडनी फेल हुई और जान नहीं बचाई जा सकी।
डॉक्टर के पर्चे और मेडिकल स्टोर की भूमिका
पुलिस जांच के अनुसार यह कफ सिरप परासिया के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी द्वारा लिखा जाता था और इसकी बिक्री उनकी पत्नी ज्योति सोनी के संचालित मेडिकल स्टोर से होती थी। मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने क्रमशः डॉक्टर, उनके परिजन और स्टोर से जुड़े अन्य व्यक्तियों को अक्टूबर-नवंबर 2025 के दौरान गिरफ्तार किया।
पीड़ित पक्ष और सरकार ने किया कड़ा विरोध
मृत बच्चों के परिजनों की ओर से दाखिल आपत्ति में आरोपियों को जमानत न देने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने भी अदालत में कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए दलील दी कि आर्थिक लाभ के लिए सुनियोजित तरीके से यह कफ सिरप उपलब्ध कराया गया, जिसके परिणामस्वरूप 30 बच्चों की जान चली गई।
गंभीरता देखते हुए नहीं मिली राहत
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामला अत्यंत गंभीर है और इस स्तर पर आरोपियों को जमानत देना उचित नहीं होगा।अदालत के इस फैसले को पीड़ित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक कदम माना जा रहा है।











