चंडीगढ़। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत के बाद अब पंजाब सरकार ने भी कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार की ड्रग टेस्टिंग लैब ने इस सिरप में डाई इथीलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) पाया है — जो एक विषैला रसायन है और मानव शरीर के लिए घातक साबित हो सकता है।
आदेश के मुताबिक, इस सिरप को “नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी” घोषित किया गया है और पंजाब में इसकी बिक्री, वितरण और उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। विभाग ने दवा विक्रेताओं और अस्पतालों को तुरंत प्रभाव से इस सिरप की बिक्री बंद करने और उपलब्ध स्टॉक को वापस करने के निर्देश दिए हैं।
Read More : Politics News : मैथिली ठाकुर का राजनीति में आगमन लगभग तय — बीजेपी के ब्राह्मण वोट समीकरण को साधने की रणनीति
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कुछ सप्ताह पहले कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौत हो गई थी। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि सिरप में मौजूद डाई इथीलीन ग्लाइकॉल ने बच्चों के लिवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाया। यह वही रसायन है, जो इससे पहले गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में हुई दवा त्रासदी में भी मौतों का कारण बना था।
इसी बीच, वकील विशाल तिवारी ने इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि जहरीले कफ सिरप की घटनाओं की जांच राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या CBI से कराई जाए और विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाए।
Read More : MP NEWS : जहरीले कफ सिरप से एक और बच्चे की मौत, आंकड़ा 17 पहुंचा; कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला…
याचिका में यह भी कहा गया है कि यह मामला केवल कुछ कंपनियों की लापरवाही का नहीं, बल्कि देश के ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम की बड़ी विफलता का प्रतीक है। इसके साथ ही याचिका में सुझाव दिया गया है कि डाई इथीलीन ग्लाइकॉल और एथीलीन ग्लाइकॉल जैसी रासायनिक सामग्रियों की बिक्री और निगरानी पर सख्त नियंत्रण लगे, जहरीली दवाइयां बनाने वाली कंपनियों के लाइसेंस तत्काल रद्द किए जाएं, और ड्रग रिकॉल पॉलिसी लागू की जाए ताकि खतरनाक दवाएं बाजार से तुरंत हटाई जा सकें।
Read More : Kanpur : नशे में महिला क्लर्क से बदसलूकी, डॉक्टर कार्रवाई के घेरे में — कांशीराम अस्पताल भेजा गया चिकित्सक
विशेषज्ञों का कहना है कि देश में दवा निगरानी प्रणाली की कमज़ोरी और लैब परीक्षणों की कमी से ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जा रही हैं। पंजाब सरकार का यह कदम अब अन्य राज्यों के लिए भी चेतावनी माना जा रहा है, ताकि ऐसी त्रासदियों को भविष्य में रोका जा सके।













