M.P News : सिंगरौली के गड़ेरिया जंगल में अवैध कटाई के आरोप, वन विभाग पर उठे सवाल, पत्रकार सुरक्षा पर मंडराता खतरा

सिंगरौली : मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के वन क्षेत्रों में एक बार फिर अवैध पेड़ कटाई को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों का दावा है कि गड़ेरिया जंगल सहित आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई जारी है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारी स्थिति सामान्य बताते हुए किसी बड़े नुकसान से इनकार कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।

वीडियो और तस्वीरों ने बढ़ाया विवाद

ग्रामीणों के अनुसार जंगल के भीतर लंबे समय से अवैध लकड़ी की निकासी हो रही है। आरोप है कि रात के समय पेड़ों को काटकर ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल के जरिए लकड़ी बाहर ले जाई जाती है। कई जगह कटे हुए पेड़ों के ठूंठ दिखाई देने से संदेह और गहरा गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और फोटो ने भी मामले को चर्चा में ला दिया है।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

जिले में अवैध कटाई को लेकर पूर्व में भी शिकायतें सामने आती रही हैं। बरगवां रेंज में बहुमूल्य पेड़ों की कटाई के आरोपों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाए थे। राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा उठ चुका है, जहां आरोप-प्रत्यारोप के बीच जांच की बात कही गई थी।

कार्रवाई न होने के आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद जमीन पर ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती। लोगों के मुताबिक यदि नियमित गश्त और निगरानी मजबूत हो, तो अवैध कटाई पर रोक लगाई जा सकती है। इस बीच क्षेत्रीय निगरानी व्यवस्था, संभावित मिलीभगत और लंबित जांच जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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पत्रकार हमले का मामला फिर चर्चा में

अवैध लकड़ी तस्करी से जुड़े एक पुराने प्रकरण और उस पर खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार पर कथित हमले की चर्चा भी दोबारा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच की अंतिम स्थिति सार्वजनिक नहीं होने से संदेह बना हुआ है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पर्यावरण और सुरक्षा पर दोहरी चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार लगातार जंगल कटने से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होता है और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका रहती है। वहीं सामाजिक संगठनों का मानना है कि वन अपराधों को उजागर करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।

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