Wednesday, August 26, 2026
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CG NEWS :  फर्जी मेडिकल बिल से 30 लाख की निकासी, पांच महीने बाद भी शिक्षक पर एफआईआर नहीं

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CG NEWS :  बिलासपुर में शिक्षा विभाग के 30 लाख रुपये के कथित फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में निलंबन के पांच महीने बाद भी आरोपी शिक्षक साधेलाल पटेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। बिल्हा विकासखंड शिक्षा अधिकारी का कहना है कि सभी जरूरी दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए गए हैं, जबकि पुलिस जांच प्रक्रिया जारी होने की बात कह रही है। इस देरी से विभागीय और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।

CG NEWS :  बिल्हा ब्लॉक के ग्राम पौंसरा में पदस्थ संकुल समन्वयक और छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के ब्लॉक अध्यक्ष साधेलाल पटेल पर पद का दुरुपयोग कर सरकारी राशि गबन करने का आरोप है। जांच में सामने आया कि मृतक सहायक शिक्षक नरेंद्र कुमार चौधरी के नाम पर 33 हजार रुपये के मेडिकल बिल को कथित रूप से कूटरचित कर 5.33 लाख रुपये दर्शाया गया और राशि आहरित की गई। इसके अलावा अपनी पत्नी और स्वयं के नाम पर भी फर्जी बिल लगाकर लगभग 30 लाख रुपये निकाले जाने का आरोप है।

CG NEWS :  संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग ने मामले को गंभीर कदाचार मानते हुए साधेलाल पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके, पांच महीने बीतने के बाद भी मामला दफ्तरों के बीच लंबित है। बीईओ कार्यालय के अनुसार गबन से जुड़े सभी मूल दस्तावेज, कूटरचित बिल और जांच रिपोर्ट सिटी कोतवाली पुलिस को सौंप दी गई है और एफआईआर के लिए लगातार फॉलोअप किया जा रहा है।

CG NEWS :  विकासखंड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक ने कहा कि विभाग की ओर से जांच पूरी कर ली गई है और सभी आवश्यक दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध करा दिए गए हैं। वहीं सिटी कोतवाली थाना प्रभारी देवेश राठौर का कहना है कि शिक्षा विभाग से प्राप्त दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण किया जा रहा है। मामला कूटरचना और वित्तीय गबन से जुड़ा होने के कारण तकनीकी साक्ष्यों का मिलान जरूरी है। तथ्यों की पुष्टि के बाद एफआईआर दर्ज की जाएगी।

CG NEWS :  विभागीय अधिकारियों के मुताबिक शिक्षा विभाग के नियमों में इतनी बड़ी राशि की तत्काल रिकवरी का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। सामान्यतः एफआईआर के बाद न्यायालयीन प्रक्रिया या सेवा समाप्ति की स्थिति में ग्रेच्युटी अथवा पेंशन से कटौती के माध्यम से वसूली की जाती है। यदि एफआईआर में देरी होती है तो आरोपी को संपत्ति ठिकाने लगाने का अवसर मिल सकता है, जिससे शासन की राशि की वसूली कठिन हो सकती है।

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