रायपुर: लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित न हो पाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष पर तीखा हमला बोला है और इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ “बड़ा विश्वासघात” बताया है।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह दिन इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होना चाहिए था, लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे होने नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के हितों की अनदेखी की है, जबकि समाजवादी पार्टी और आरजेडी पर भी उन्होंने महिलाओं के प्रति अपमानजनक रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
अरुण सिंह ने कहा कि बिल पास न होने के बाद विपक्ष द्वारा खुशी जताना दुर्भाग्यपूर्ण है। “हमारी आंखों में आंसू थे, लेकिन विपक्ष जश्न मना रहा था। कांग्रेस ने बहुत बड़ा पाप किया है और इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा,” उन्होंने कहा।
वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में प्राचीन काल से महिलाओं का सम्मान होता आया है और उन्हें देवी स्वरूप माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक नेतृत्व में मजबूत भागीदारी दिलाने की दिशा में बड़ा कदम था, लेकिन विपक्ष ने इसे रोककर देश की आधी आबादी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि उन्होंने जानबूझकर इस बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि “यह 70 करोड़ महिलाओं के साथ धोखा है।”
साय ने राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जैसे उज्ज्वला योजना और महतारी वंदन योजना, जिसके तहत लाखों महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि पिछले तीन दशकों से महिला आरक्षण की बात होती रही है, लेकिन हर बार कांग्रेस इसे टालती रही है। “जब भी इसे लागू करने का समय आता है, कांग्रेस पीछे हट जाती है,” उन्होंने आरोप लगाया।
भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष जारी रहेगा और वे लोकसभा तथा विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए प्रयासरत रहेंगे।











