CG News : गौरी शंकर गुप्ता/ घरघोड़ा| एनटीपीसी तलाईपल्ली कोल माइंस प्रोजेक्ट एक बार फिर विवादों में है। इस बार विवाद की वजह ठेका व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था और श्रमिकों के बीच असमानता है। परियोजना से जुड़े संविदाकर्मियों ने प्रबंधन को पत्र लिखकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
‘One Site – One Contract’ नीति का उल्लंघन
श्रमिकों ने प्रबंधन को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि एक ही कार्यस्थल पर तीन-तीन ठेकेदारों से मैनपावर ली जा रही है, जबकि केंद्र सरकार की नीति “One Site – One Contract” पारदर्शिता और समानता की बात करती है।
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“समान काम, असमान वेतन” का विवाद:
- संविदाकर्मियों का मुख्य आरोप है कि अलग-अलग ठेकेदारों के तहत काम करने वाले मजदूरों के वेतन और भत्तों में भारी अंतर है।
- कुछ मजदूरों को HRA (मकान किराया भत्ता) और कम्युनिकेशन अलाउंस मिल रहा है, जबकि समान कार्य करने वाले अन्य मजदूर इन सुविधाओं से वंचित हैं।
- श्रमिकों का कहना है कि यह स्थिति Contract Labour (Regulation & Abolition) Act, 1970 की भावना के खिलाफ है, जो समान कार्य के लिए समान वेतन और सुविधाएँ अनिवार्य करता है।
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CG News : ठेका अवधि और प्रबंधन की चुप्पी
श्रमिकों ने मांग की है कि सभी मैनपावर सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स को एकीकृत कर एक ही एजेंसी को जिम्मेदारी दी जाए, ताकि भेदभाव समाप्त हो।
- अस्थिरता का मुद्दा: श्रमिकों ने अस्थिरता को खत्म करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट की अवधि तीन वर्ष करने का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान में ये कॉन्ट्रैक्ट्स हर साल जारी किए जाते हैं, जिससे ठेकेदारों की मनमानी बढ़ती है और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा खतरे में रहती है।
- अल्टीमेटम: श्रमिकों ने बताया कि 15 अक्टूबर 2025 को पत्र भेजने के बावजूद कोई उत्तर नहीं मिला। अब दोबारा स्मरण पत्र भेजकर उन्होंने तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। यदि इस अवधि में निर्णय नहीं लिया गया, तो वे Factories Act, 1948 की धारा 111-A के तहत आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
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श्रम कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह मामला औद्योगिक विवाद में बदल सकता है, जिससे न केवल उत्पादन प्रभावित होगा, बल्कि एनटीपीसी की साख पर भी असर पड़ेगा।













