रायपुर। छत्तीसगढ़ के जंगल सफारी की बाघिन बिजली की गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा में इलाज के दौरान मौत हो गई। वनतारा एडमिनिस्ट्रेशन और छत्तीसगढ़ पीसीसीएफ चीफ अरुण कुमार पांडेय ने इस बात की पुष्टि की है। जंगल सफारी की डीएफओ और मेडिकल टीम तुरंत जामनगर के लिए रवाना हुई, जहां बिजली का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
बिजली की उम्र 8 साल थी और पिछले कुछ समय से वह बीमार चल रही थी। उसका यूट्रस-ओरल में संक्रमण था और पिछले 10 दिन से खाना-पीना बंद कर दिया था। बेहतर इलाज के लिए उसे 7 अक्टूबर को वनतारा वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजा गया, जो 9 अक्टूबर की रात गुजरात पहुंचा।
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वन विभाग के अनुसार, शुरुआत में उसकी बीमारी को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पाचन तंत्र) समस्या के रूप में डाइग्नोज किया गया। बाद में अल्ट्रासाउंड और हेमेटोलॉजिकल जांच में किडनी और गर्भाशय में संक्रमण के लक्षण मिले। विशेषज्ञों ने रायपुर में भी इलाज शुरू किया, लेकिन उन्नत सर्जिकल केयर के लिए उसे गुजरात भेजा गया।
इस दौरान सीजेडए से अनुमति मिलने में 10 दिन लग गए, जिससे इलाज में देरी हुई। वनतारा टीम ने 5 अक्टूबर को रायपुर पहुंचकर जांच की थी और बताया कि बिजली पहले से ही कमजोर और बीमार थी।
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वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने सवाल उठाए कि छत्तीसगढ़ से गुजरात तक बाघिन को ट्रैवल कराने के बजाय राज्य के नजदीकी विशेषज्ञ डॉक्टर टीम बुलाकर इलाज किया जा सकता था। उनका कहना है कि जल्दी एक्शन लिया जाता तो बिजली की जान बच सकती थी। बिजली, जंगल सफारी में 9 साल पहले लाए गए नर बाघ शिवाजी की पहली शावक थी। जहां उसके पिता शिवाजी आए थे, बिजली ने भी वहीं अंतिम सांस ली।











