Border Trade : ट्रंप के टैरिफ पर भारत-चीन की साझी चाल, 5 साल बाद LAC पर फिर बजेगा कारोबार का बिगुल

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Border Trade : नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया भर के देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने के बीच भारत और चीन एक साथ आने की तैयारी कर रहे हैं। पांच साल से ठप पड़ा बॉर्डर ट्रेड (सीमा व्यापार) फिर से शुरू होने की संभावना बन गई है।

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ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश स्थानीय उत्पादों के आदान-प्रदान के लिए सीमा पर तय व्यापारिक प्वाइंट्स को दोबारा खोलने पर विचार कर रहे हैं। यह कदम दोनों एशियाई पड़ोसियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है।

चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि बीजिंग इस मसले पर भारत के साथ संवाद और समन्वय बढ़ाने को तैयार है। मंत्रालय ने कहा — “सीमा व्यापार लंबे समय से दोनों देशों के सीमावर्ती निवासियों के जीवन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता रहा है।” वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

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भारत और चीन के बीच किन चीजों का होता रहा है व्यापार?

करीब तीन दशकों तक भारत और चीन के बीच मसाले, कालीन, लकड़ी का फर्नीचर, मवेशियों का चारा, मिट्टी के बर्तन, औषधीय पौधे, इलेक्ट्रिक सामान और ऊन जैसे स्थानीय उत्पादों का आदान-प्रदान होता रहा। यह कारोबार तीन तय प्वाइंट्स से 3,488 किलोमीटर लंबी विवादित हिमालयी सीमा के जरिए होता था।

2017-18 में इस व्यापार का मूल्य महज 3.16 मिलियन डॉलर था। इसके बाद कोविड-19 महामारी के दौरान यह पूरी तरह बंद हो गया। इसी समय गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प ने रिश्तों को ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचा दिया था, जिसमें भारत के 20 जवान और चीन के कम से कम 4 सैनिक मारे गए थे।

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अब पिघल रही है रिश्तों पर जमी बर्फ

संकेत मिल रहे हैं कि रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। बीते साल दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई कदम उठाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले महीने भारत-चीन के बीच सीधी उड़ानें भी फिर शुरू हो सकती हैं। इसके साथ ही बीजिंग ने भारत के लिए कुछ उर्वरक निर्यात पर लगी पाबंदियां भी हटा दी हैं।

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगस्त में सात साल बाद पहली बार चीन जा सकते हैं। वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) समिट में शामिल होंगे और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक भी कर सकते हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा व्यापार की बहाली केवल आर्थिक पहल नहीं है, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। यह दिखाता है कि भारत और चीन आपसी मतभेदों के बावजूद सहयोग के रास्ते तलाश रहे हैं। हालांकि, असली चुनौती यह होगी कि क्या यह पहल दोनों देशों के रिश्तों में स्थायी सुधार का रास्ता खोल पाएगी या नहीं।

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