Bihar Voter List Revision : नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर तीसरे दिन सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग (Election Commission) को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए 65 लाख लोगों के नाम सार्वजनिक करने के निर्देश दिए। बेंच में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य बातें :
- जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह कार्रवाई नागरिकों के मताधिकार को प्रभावित कर सकती है, इसलिए निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया जरूरी है।
- अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि हटाए गए लोगों की पहचान और उनकी सूची जनता के लिए क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई।
- सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि हटाए गए लोगों की सूची वेबसाइट पर डालें, ताकि परिवार और नागरिक अपने सदस्यों की स्थिति जान सकें। इसमें आधार नंबर, ईपीआईसी और हटाने का कारण स्पष्ट किया जाए।
- जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि अदालत सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जानकारी सार्वजनिक हो।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया:
- चुनाव आयोग ने कहा कि वे हर विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से सूची जारी करेंगे और यह जानकारी जिला स्तर पर भी उपलब्ध कराई जाएगी।
- मृतक या जीवित होने वाले नामों की पहचान के लिए अधिकारी और स्वयंसेवक घर-घर जाएंगे।
- आयोग ने कहा कि वेबसाइट पर नाम और ईपीआईसी नंबर दर्ज करके लोग अपने सदस्य की स्थिति जान सकते हैं।
विवरण:
- सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी 2025 तक बिहार में कुल 7.89 करोड़ लोग थे। इनमें से 7.24 करोड़ लोगों ने फॉर्म भरे हैं, और 65 लाख नाम हटाए गए।
- 65 लाख में से लगभग 22 लाख लोग मृत हैं।
- अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि ग्रामीण और गरीब आबादी के लिए पारदर्शी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई, ताकि लोग स्थानीय राजनीतिक दलों के पीछे न भागें।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को पारदर्शिता सुनिश्चित करने और हटाए गए मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी जोर दिया कि नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा सर्वोपरि है और उन्हें किसी भी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए।













