Bihar Elections 2025 : नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो गई है और पहले चरण का मतदान ठीक एक महीने बाद होना है। इस बार चुनावी रण में कौन बाज़ी मारेगा, इसका फैसला सात प्रमुख फैक्टर्स तय करेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, तेजस्वी यादव, राहुल गांधी और नए चेहरे प्रशांत किशोर जैसे नेता इन फैक्टर्स की दिशा और प्रभाव के हिसाब से अपनी किस्मत आजमाएंगे।
1. नीतीश कुमार की सेहत और पकड़ पर सवाल
नीतीश कुमार की उम्र और हालिया सेहत विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बन चुकी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि वे अब प्रशासन पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे और निर्णयों पर कुछ चुनिंदा लोगों का प्रभाव है। तेजस्वी यादव बार-बार नीतीश के सार्वजनिक कार्यक्रमों के वीडियो साझा कर इस बात को हवा दे रहे हैं। हालांकि जेडीयू और भाजपा इन दावों को नकारते हुए कहते हैं कि चुनाव नीतीश के नेतृत्व में ही लड़ा जा रहा है।
2. चुनाव से पहले योजनाओं की बारिश
एनडीए सरकार ने चुनाव से ठीक पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए कई लोकलुभावन योजनाएं लागू की हैं। महिलाओं को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता, मुफ्त बिजली, पेंशन में बढ़ोतरी, बेरोजगारी भत्ता जैसी योजनाओं का ऐलान कर दिया गया है। ये योजनाएं चुनावी लाभ पहुंचा सकती हैं लेकिन विपक्ष इन्हें चुनावी “जुगाड़” बता रहा है।
3. वोट चोरी का आरोप और उसका असर
महागठबंधन ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी का आरोप लगाया था। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने इसके खिलाफ यात्राएं भी निकालीं, लेकिन अब महागठबंधन की रणनीति में यह मुद्दा प्रमुखता में नहीं दिख रहा है। इससे साफ है कि शायद उन्हें इस मुद्दे से अपेक्षित जन समर्थन नहीं मिला।
4. चेहरा कौन? मोदी या नीतीश
एनडीए ने चुनावों में नीतीश को चेहरा बताया है, लेकिन उनके भविष्य को लेकर स्पष्टता नहीं है। नीतीश की declining health को देखते हुए भाजपा पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव पर निर्भर दिख रही है। स्थानीय नेतृत्व की कमी ने मोदी को ही मुख्य प्रचारक और भरोसेमंद चेहरा बना दिया है।
5. प्रशांत किशोर का एंट्री फैक्टर
चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज, एनडीए के लिए संभावित चुनौती बनकर उभरी है। उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और प्रवास जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा है। कई इलाकों में उनकी सभाओं में भीड़ देखी गई है, जिससे साफ है कि उनकी मौजूदगी कुछ सीटों पर समीकरण बिगाड़ सकती है, खासकर एनडीए के लिए।
6. भ्रष्टाचार के आरोपों की गूंज
प्रशांत किशोर ने कई एनडीए नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। जमीन खरीद से लेकर फर्जी दस्तावेजों तक का मुद्दा उठाकर उन्होंने एनडीए को जवाब देने पर मजबूर कर दिया है। इन आरोपों से महागठबंधन को हवा मिल सकती है। वहीं भाजपा ने किशोर पर ही फंडिंग में गड़बड़ी का आरोप लगाकर पलटवार किया है।
7. लालू यादव का जंगलराज नैरेटिव
Bihar Elections 2025 : एनडीए एक बार फिर आरजेडी के शासनकाल को ‘जंगलराज’ कहकर मतदाताओं को डराने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस बार बड़ी संख्या में ऐसे युवा पहली बार वोट डालने जा रहे हैं, जिन्होंने उस दौर को खुद नहीं देखा। उनके लिए बेरोजगारी और आर्थिक अवसर जैसे मुद्दे अधिक अहम हो सकते हैं, जिससे यह नैरेटिव कमजोर पड़ सकता है।
Bihar Elections 2025 : बिहार चुनाव 2025 की तस्वीर इन सात फैक्टर्स के इर्द-गिर्द घूम रही है। जहां एक ओर एनडीए अपने पुराने फॉर्मूले और नए वादों के सहारे मैदान में है, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन और जन सुराज जैसे विकल्प चुनौती पेश कर रहे हैं। नतीजे यह तय करेंगे कि मतदाता परंपरा से बंधे रहते हैं या बदलाव की ओर कदम बढ़ाते हैं।













