भोपाल : राजधानी भोपाल में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीने के पानी की गुणवत्ता जांच जैसे संवेदनशील कार्य में भारी लापरवाही सामने आई है, जिससे करीब 30 लाख लोगों की सेहत जोखिम में पड़ती नजर आ रही है। इंदौर में हाल ही में हुए जल आपूर्ति हादसे से सबक लेने के बजाय भोपाल नगर निगम वही पुरानी और खतरनाक व्यवस्था के भरोसे राजधानी की जल व्यवस्था चला रहा है।
ड्राइवर कर रहा पानी के सैंपल कलेक्शन
सूत्रों के अनुसार, भोपाल नगर निगम का ड्राइवर पंकज जांगड़े बीते कई दिनों से शहर के अलग-अलग इलाकों से पानी के सैंपल ले रहा है। बुधवार को उसने टीटी नगर और रोशनपुरा क्षेत्र से भी पानी के सैंपल कलेक्ट किए। हैरानी की बात यह है कि ड्राइवर न केवल सैंपल ले रहा है, बल्कि कई स्थानों पर खुद ही टेस्ट ट्यूब में क्लोरीन की जांच भी करता नजर आया।

तकनीकी स्टाफ की भारी कमी
नगर निगम पूरे भोपाल के 15 फिल्टर प्लांट केवल 4 केमिस्टों के भरोसे संचालित कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतनी बड़ी आबादी और इतने प्लांट्स के लिए यह संख्या बेहद कम है। इससे पानी की गुणवत्ता की नियमित और वैज्ञानिक जांच पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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विजुअली चैलेंज्ड लेब असिस्टेंट से कराई जा रही जांच
जानकारी के मुताबिक, नगर निगम में पदस्थ विजुअली चैलेंज्ड लेब असिस्टेंट अशोक विश्वकर्मा से भी सैकड़ों पानी के सैंपल टेस्ट कराए गए हैं। इस तथ्य ने नगर निगम की व्यवस्था और जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
निगम के अधिकारी का बयान
इस पूरे मामले पर नगर निगम के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर उदित गर्ग का कहना है कि “पानी की सैंपलिंग कोई भी कर सकता है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अशोक विश्वकर्मा सैंपल टेस्ट नहीं करते, बल्कि केवल लैब में बैठकर अन्य कार्य देखते हैं।
जनस्वास्थ्य पर खतरे की घंटी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पीने के पानी की जांच में इस तरह की लापरवाही जारी रही, तो शहर में जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। सवाल यह है कि क्या नगर निगम समय रहते अपनी व्यवस्था सुधारेगा या राजधानीवासियों को इसी तरह जोखिम में डालता रहेगा।











