Bhagirathpura Water Crisis : इंदौर: भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की घटना के बाद शासन-प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए जांच के आदेशों के पालन में आज इंदौर की रेसीडेंसी कोठी पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में प्रदेश के दिग्गज मंत्रियों के साथ-साथ शासन के शीर्ष अधिकारी मौजूद हैं।
सरकार के कड़े तेवर: बैठक में बड़े नाम शामिल
बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और स्वयं प्रदेश के मुख्य सचिव (Chief Secretary) शामिल हैं। साथ ही संभाग आयुक्त, कलेक्टर और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं। बैठक का मुख्य एजेंडा भागीरथपुरा की घटना के कारणों की समीक्षा करना और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार चेहरों को चिन्हित करना है।
मुख्यमंत्री के ‘एक्शन मोड’ के बाद हलचल
गौरतलब है कि बीते कल मुख्यमंत्री स्वयं इंदौर पहुंचे थे। उन्होंने अस्पताल जाकर मरीजों का हाल चाल जाना था और शोक संतप्त परिवारों को ढांढस बंधाया था। मुख्यमंत्री ने अस्पताल से निकलते ही इस पूरे कांड की उच्च स्तरीय जांच के कड़े निर्देश दिए थे। आज की यह बैठक उसी निर्देश का अगला चरण मानी जा रही है, जिसमें जांच की प्रगति और प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक जलापूर्ति की व्यवस्था पर चर्चा हो रही है।
भागीरथपुरा कांड: अब तक क्या हुआ?
भागीरथपुरा क्षेत्र में ड्रेनेज का पानी पेयजल लाइन में मिलने से संक्रमण फैला, जिसके कारण अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में लोग उपचाररत हैं। विपक्ष के तीखे हमलों और जनता के आक्रोश के बीच अब सरकार इस मामले में सख्त कार्रवाई कर एक कड़ा संदेश देना चाहती है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद नगर निगम के कुछ अधिकारियों और क्षेत्रीय जिम्मेदारों पर निलंबन या अन्य बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की घोषणा की जा सकती है।













