Monday, September 7, 2026
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Bacheli NMDC: बचेली में सुरक्षा बनाम पुनर्वास की जंग: टेलिंग डैम के नीचे बसे 10 परिवारों को 10 दिन में बेदखली का आदेश

Bacheli NMDC: फकरे आलम खान/बचेली। लौह नगरी बचेली में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) के टेलिंग डैम-1 के नीचे बसे परिवारों की सुरक्षा और विस्थापन को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक और मानवीय संकट खड़ा हो गया है। एनएमडीसी प्रबंधन की शिकायत और आईआईटी (IIT) मुंबई की सर्वे टीम की बेहद संवेदनशील रिपोर्ट का हवाला देते हुए अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) बचेली ने एक कड़ा रुख अख्तियार किया है। प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 152 के तहत आधिकारिक आदेश जारी करते हुए डैम के संवेदनशील क्षेत्र में रह रहे 10 परिवारों को आगामी 10 दिनों के भीतर कब्जा खाली करने का अंतिम निर्देश दिया है। प्रशासन का साफ कहना है कि यदि तय समयसीमा में इन परिवारों ने स्वयं मकान खाली नहीं किए, तो 14 जून 2026 को भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में जबरन बेदखली (कब्जा हटाने) की कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा।

IIT मुंबई की रिपोर्ट ने दी बड़ी चेतावनी, मानसून में मलबे की आशंका

एनएमडीसी प्रबंधन द्वारा बुलाई गई आईआईटी मुंबई की विशेषज्ञ टीम की जांच रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाले और डराने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले मानसून के दौरान इस क्षेत्र में भीषण भूस्खलन (Landslide) हुआ था, जिससे बांध का एक बड़ा हिस्सा धंस गया था। वर्तमान में भी टेलिंग पोंड से लगातार पानी और स्लरी (लोहे के कीचड़) का रिसाव हो रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आगामी मानसून सत्र में भारी बारिश के चलते बांध के टूटने या बड़े पैमाने पर पानी व कीचड़ के तीव्र बहाव की पूरी आशंका है, जिससे नीचे रह रहे लोगों के जान-माल को सीधे तौर पर गंभीर खतरा है। इसी सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने इसे ‘रेड जोन’ मानते हुए खाली कराने का फैसला किया है।

45-50 साल पुराना है डैम, अब मुआवजा बनाम पुनर्वास पर अड़े प्रभावित

एनएमडीसी के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस टेलिंग डैम का निर्माण करीब 45 से 50 वर्ष पहले किया गया था, जब इस पूरे इलाके में कोई मानवीय आबादी नहीं थी। बाद के वर्षों में आरक्षित वन भूमि और डैम के डेंजर जोन में लोगों ने अनाधिकृत रूप से अपने आशियाने बना लिए। वर्तमान में प्रभावित इन 10 परिवारों को कुल मिलाकर लगभग 34 लाख रुपये की नकद क्षतिपूर्ति (मुआवजा) दी जा रही है। साथ ही, तात्कालिक आपातकालीन व्यवस्था के तौर पर नगर पालिका के सामुदायिक भवन और एनएमडीसी मंगल भवन को चिन्हित किया गया है। इसके बावजूद, प्रभावित परिवारों का कहना है कि आसमान छूती जमीनों की कीमतों के बीच केवल नकद मुआवजा नए सिरे से जिंदगी शुरू करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

जमीन और स्वास्थ्य सेवाओं का उठा मुद्दा

वार्ड की स्थानीय मितानिन पंचमी चौहान ने अपनी व्यावहारिक समस्या साझा करते हुए कहा, “हमें मुआवजा तो दिया जा रहा है, लेकिन मैं इसी वार्ड में वर्षों से मितानिन के रूप में स्वास्थ्य कार्य कर रही हूं। यदि प्रशासन ने हमें दूसरे वार्ड में भेज दिया, तो गरीब मरीजों और गर्भवती महिलाओं तक समय पर मेरी पहुंच मुश्किल हो जाएगी। हमारी मांग है कि हमें वार्ड क्रमांक 9 में ही कहीं छोटा सा भूखंड दिया जाए।” एक अन्य प्रभावित प्रमिला कड़ती ने दर्द बयां करते हुए कहा कि वे रोज कमाकर खाने वाले मजदूर वर्ग के लोग हैं, जो पिछले 6-7 साल से यहां रह रहे हैं। मुआवजे के पैसों से आज के दौर में जमीन खरीदना नामुमकिन है, इसलिए सरकार को मुआवजे के साथ एक छोटा सा प्लॉट भी देना चाहिए।

दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर वार्ड पार्षद अप्पू कुंजाम ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि स्लरी पाइप लाइन से प्रभावित वैध परिवारों को पूर्व में ही विस्थापन की नीति का पूरा लाभ दिया जा चुका है। टेलिंग डैम के डेंजर जोन में अनाधिकृत रूप से हाल के वर्षों में आवास बनाने वालों का शुरुआत में ही स्थानीय वार्डवासियों ने पुरजोर विरोध किया था, और तब इन लोगों ने स्वयं हटने का वादा किया था। पार्षद के अनुसार, केवल एक परिवार जो बहुत लंबे अरसे से यहां निवासरत है, उसे मानवीय आधार पर विस्थापन का अतिरिक्त लाभ देने पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल, जिला प्रशासन और एनएमडीसी प्रबंधन जहां नागरिकों की जीवन रक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बता रहे हैं, वहीं प्रभावित परिवार अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। यह पूरा मामला अब Bastar अंचल में ‘सुरक्षा बनाम पुनर्वास’ का एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बन चुका है।

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