‘नो बेड’…रायपुर AIIMS में बढ़ा मरीजों का दबाव! बेड और जांच सुविधाओं की कमी से मरीज परेशान

Rahul Goshwami

रायपुर : छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल रायपुर AIIMS इन दिनों मरीजों के बढ़ते दबाव से जूझ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि सामान्य ही नहीं, बल्कि गंभीर मरीजों को भी इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। मरीजों और उनके परिजनों को घंटों इंतजार करने के बाद भी राहत नहीं मिल पा रही।

गंभीर मरीजों को भी नहीं मिल रहे बिस्तर

रायपुर AIIMS की ओपीडी में रोजाना करीब 3 से 4 हजार मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं इमरजेंसी में 150 से 200 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। अस्पताल में करीब 1000 बेड उपलब्ध हैं, लेकिन बढ़ती संख्या के कारण व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है।

स्थिति यह है कि ब्रेन हेमरेज, लीवर संबंधी बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और छाती संबंधी गंभीर समस्याओं वाले मरीजों को भी मेकाहारा, डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल और DKS अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
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इलाज के लिए घंटों इंतजार

मरीजों को इलाज और भर्ती के लिए 3 से 5 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई मामलों में समय पर बेड नहीं मिलने से परिजनों को मरीजों को निजी अस्पतालों में ले जाना पड़ रहा है, जिससे इलाज का खर्च काफी बढ़ रहा है।स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव का असर अब सीधे मरीजों की सुविधा और इलाज की गुणवत्ता पर दिखाई देने लगा है।

जांच सुविधाओं पर भी भारी दबाव

AIIMS रायपुर में MRI, CT Scan, सोनोग्राफी और एक्स-रे जैसी जरूरी जांचों के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। मरीजों को जांच रिपोर्ट मिलने में भी देरी हो रही है।इसी वजह से कई लोग मजबूरी में प्राइवेट लैब का सहारा ले रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

क्यों बढ़ रही है समस्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ सहित आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज AIIMS रायपुर पहुंच रहे हैं, लेकिन उसी अनुपात में अस्पताल की क्षमता और संसाधनों का विस्तार नहीं हो पाया है।मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच डॉक्टरों, स्टाफ और बेड की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

लगातार बढ़ती भीड़ और मरीजों को रेफर किए जाने की घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में यह स्थिति है, तो आम मरीजों की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

अब जरूरत इस बात की महसूस की जा रही है कि अस्पताल की क्षमता बढ़ाई जाए और जांच सुविधाओं को मजबूत किया जाए, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

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