Adani Foundation : सिंगरौली। सिंगरौली जिले के सरई तहसील अंतर्गत धिरौली और सुलियारी खदान क्षेत्र के आस-पास के गाँवों—धिरौली, झलरी, बजौड़ी, डोंगरी, अमरईखोह, बेलवार और बासी बेरदहा—में अदाणी फाउंडेशन द्वारा आजीविका, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में कई महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन पहलों से महिलाओं, युवाओं और विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने में निरंतर मदद मिल रही है।
महिलाओं को सशक्त बना रही ‘सक्षम योजना’
अदाणी फाउंडेशन की ‘सक्षम योजना’ के तहत सिंगरौली क्लस्टर में अब तक 120 महिलाओं को निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण दिया गया है। पिछले तीन वर्षों में झलरी, खनुआ और धिरौली गाँवों में तीन निःशुल्क सिलाई केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहाँ प्रत्येक केंद्र पर 20 आधुनिक सिलाई मशीनें उपलब्ध हैं।
हर बैच में 20 महिलाओं और किशोरियों को तीन महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने पर उन्हें राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) से प्रमाण-पत्र भी मिलता है।
Adani Foundation : सरस्वती सोनी, ग्राम झलरी
“प्रशिक्षण के बाद अब मैं घर पर रहकर रोज़ाना लगभग पाँच सौ रुपये तक कमा लेती हूँ।”
पशुधन विकास से ‘गौ समृद्धि’
धिरौली और सुलियारी खदान परियोजना क्षेत्रों से लगे 18 गाँवों में अदाणी फाउंडेशन द्वारा ‘गौ समृद्धि परियोजना’ चलाई जा रही है। बायफ (भारतीय एग्रो इंडस्ट्रीज फाउंडेशन) के सहयोग से संचालित इस कार्यक्रम में महिला पशुपालकों को प्रशिक्षण देकर पशुधन विकास और आय बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक 400 से अधिक महिला पशुपालक इस पहल से जुड़ चुकी हैं, जबकि इस वर्ष 100 और महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य है।
Adani Foundation : लीलावती सिंह, ग्राम धिरौली
“इस परियोजना ने न सिर्फ पशुओं की नस्ल सुधारी है, बल्कि हम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में भी मदद की है।”
ग्रामीण बच्चों के लिए निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग
ग्रामीण विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के अवसर प्रदान करने के लिए, अदाणी फाउंडेशन ‘डाइट फाउंडेशन’ के सहयोग से सरई और खनुआ नया में निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग उपलब्ध करा रहा है।
यहाँ बैंक, एसएससी, रेलवे, पटवारी, पुलिस, वन विभाग आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जा रही है। साथ ही, अनुभवी शिक्षकों द्वारा नवोदय व एकलव्य आवासीय विद्यालय में प्रवेश की तैयारी भी कराई जा रही है। पाँचवीं कक्षा के 125 बच्चों का पंजीकरण कराया गया है, जिन्हें निःशुल्क पुस्तकें और अध्ययन सामग्री दी जा रही है ताकि संसाधनों की कमी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई बाधित न हो।













