Accidental Mayor : इंदौर में सज्जन सिंह वर्मा का ‘सियासी प्रहार’ : महापौर को बताया “एक्सीडेंटल”, 5 लाख वोटर्स गायब होने का किया दावा

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Accidental Mayor : इंदौर। इंदौर की राजनीति में बुधवार को उस समय उबाल आ गया जब पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री और कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा सरकार, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर जमकर निशाना साधा। वर्मा ने शहर के विकास कार्यों से लेकर मतदाता सूची तक के मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

Accidental Mayor : “महापौर को ब्रिज की ABCD भी नहीं पता” सज्जन सिंह वर्मा ने इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उन्हें “एक्सीडेंटल महापौर” करार दिया। उन्होंने कहा कि साढ़े छह किलोमीटर के एलिवेटेड ब्रिज को लेकर महापौर भ्रमित हैं और उन्हें तकनीकी विषयों की ‘एबीसीडी’ तक नहीं आती। वर्मा ने आरोप लगाया कि 288 करोड़ की लागत वाले इस ब्रिज को पहले भाजपा ने ही रद्द किया और फिर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंजूरी दी, जो भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

Accidental Mayor : वोटर लिस्ट से 5 लाख नाम गायब होने का सनसनीखेज आरोप चुनावों को लेकर वर्मा ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि इंदौर से करीब पांच लाख वोटर्स के नाम गायब हुए हैं। उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि एक खास नरेटिव सेट करने की कोशिश की जा रही है। इस मुद्दे पर उन्होंने भोपाल में राज्य निर्वाचन आयोग से मुलाकात की है और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय चुनाव आयोग तक जाने की चेतावनी दी है।

Accidental Mayor : भ्रष्टाचार और बदहाल सड़कों पर घेरा शहर की बुनियादी सुविधाओं पर बात करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि पूरे इंदौर में सड़कों का बुरा हाल है। उन्होंने बीआरटीएस के निर्माण और स्विमिंग पूल घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि जनता सब देख रही है। उन्होंने कहा, “मैं लाठी उठाकर मारने नहीं जाऊंगा, लेकिन जनता को सच्चाई बताकर जागरूक जरूर करूंगा।”

Accidental Mayor : कैलाश विजयवर्गीय और महापौर को इस्तीफे की चुनौती हाल ही में समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों द्वारा ‘चमकाए’ जाने वाले बयान को लेकर वर्मा ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पुष्यमित्र भार्गव पर तंज कसा। उन्होंने दोनों नेताओं को चुनौती दी कि यदि वे वास्तव में व्यवस्था से नाराज हैं, तो अपने पदों से इस्तीफा दें और स्वतंत्र होकर अपनी ही सरकार का विरोध करके दिखाएं। इसके साथ ही उन्होंने मनरेगा का नाम बदलने और गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर भी कटाक्ष किया।

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