नागपुर : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने महानुभाव पंथ के सम्मेलन में लोगों से अपील की कि धर्म और राजनीति को अलग रखा जाए। उन्होंने कहा कि धर्म का राजनीति में इस्तेमाल समाज के लिए हानिकारक है और इससे विकास और रोजगार पर ध्यान कम हो जाता है।
गडकरी ने बताया कि धर्म व्यक्तिगत श्रद्धा का विषय है, जबकि राजनीति का उद्देश्य समाज की भलाई और सेवा होना चाहिए। उन्होंने महानुभाव पंथ के संस्थापक चक्रधर स्वामी की शिक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि सत्य, अहिंसा, शांति, मानवता और समानता जैसे मूल्य जीवन में बदलाव लाते हैं।
सम्मेलन में उन्होंने तीन प्रमुख बातें साझा कीं—बोलना आसान, करना कठिन; जो अच्छा मूर्ख बना सकता है, वही नेता; और शॉर्टकट से मंजिल अधूरी रहती है। गडकरी ने कहा कि राजनीति में शॉर्टकट लेने से सफलता अधूरी रह जाती है।
अपने पिछले बयानों का हवाला देते हुए गडकरी ने कहा कि समाज में अनुशासन और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार के खिलाफ केस करना भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जाति और धर्म के नाम पर राजनीति करना गलत है और इसे सार्वजनिक रूप से नहीं किया जाना चाहिए।
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गडकरी ने नेताओं और समाजसेवकों को सलाह दी कि वे ईमानदारी, समर्पण और विश्वसनीयता को अपनाएं और आलोचनाओं को बर्दाश्त करने की क्षमता रखें। उनका संदेश स्पष्ट था—धर्म कार्य, समाज कार्य और राजनीति कार्य अलग-अलग होने चाहिए और समाज के हित में काम करना सर्वोपरि है।













