Sunday, August 16, 2026
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Gharghoda Water Crisis : बिना हार्वेस्टिंग के बने सैकड़ों निर्माण, व्यर्थ बह गया बारिश का पानी, अब बूंद-बूंद को तरस रहे लोग

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गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा (रायगढ़): छत्तीसगढ़ के घरघोड़ा क्षेत्र में सूर्यदेव के तेवर तीखे होते ही जल संकट ने अपना डरावना रूप दिखाना शुरू कर दिया है। शासन की स्पष्ट गाइडलाइन और भू-जल स्तर सुधारने के तमाम दावों के बीच, घरघोड़ा में प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही अब आम जनता के लिए मुसीबत बन गई है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग की अनिवार्यता के निर्देशों को ‘ठंडे बस्ते’ में डालने का नतीजा यह है कि क्षेत्र का वाटर लेवल चिंताजनक रूप से नीचे जा रहा है।

कागजों तक सीमित रहा ‘वाटर हार्वेस्टिंग’ मिशन

नियमों के मुताबिक, हर सरकारी और निजी भवन के निर्माण के समय वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य था। प्रशासन का स्पष्ट आदेश है कि सरकारी इमारतों की छतों से गिरने वाले बारिश के पानी को वैज्ञानिक पद्धति से जमीन के भीतर उतारा जाए, ताकि भविष्य के लिए जल सुरक्षित हो सके। लेकिन घरघोड़ा में अधिकारियों ने कुछ चुनिंदा इमारतों में सिस्टम लगाकर महज खानापूर्ति कर ली। शहरी और ग्रामीण इलाकों में धड़ल्ले से हुए निर्माण कार्यों में इस नियम को सख्ती से लागू नहीं कराया गया, जिससे बारिश का कीमती पानी जमीन में जाने के बजाय नालियों में बहकर बर्बाद हो गया।

40 डिग्री तापमान और ‘सूखे’ के आसार

अभी गर्मी की शुरुआत ही हुई है और पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है। कुएं, तालाब और हैंडपंप सूखने की कगार पर हैं। नगर पंचायत के पार्षदों ने टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की तैयारी तो शुरू कर दी है, लेकिन यह केवल एक ‘बैंड-एड’ जैसा समाधान है। स्थाई समाधान के अभाव में स्थानीय निवासियों की चिंता आगामी भीषण महीनों को लेकर बढ़ती जा रही है।

रसूखदारों का ‘पहरा’, जनता बेसहारा

रिपोर्ट के अनुसार, एक बड़ी समस्या सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग की भी है। नगर में विभिन्न सरकारी मदों से कराए गए कई बोर खनन पर कुछ रसूखदार लोगों ने अपना निजी कब्जा जमा लिया है। ये रसूखदार सार्वजनिक हित के पानी का उपयोग अपने निजी स्वार्थ के लिए कर रहे हैं। यदि प्रशासन साहस दिखाकर इन कब्जों को मुक्त करा दे और उन बोर को सार्वजनिक पाइपलाइन से जोड़ दे, तो पेयजल की किल्लत काफी हद तक खत्म हो सकती है।

प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल

शासकीय विभागों को जल संचयन की जिम्मेदारी में अग्रणी भूमिका निभानी थी, लेकिन यहाँ व्यवस्था ही सवालों के घेरे में है। अधिकारियों को पूर्व में ही निर्देशित किया गया था कि पुराने कार्यालयों में भी हार्वेस्टिंग सिस्टम दुरुस्त किए जाएं, ताकि वे समाज के लिए उदाहरण पेश कर सकें। फिलहाल, नगर पंचायत सीएमओ और अध्यक्ष द्वारा टैंकरों से राहत पहुँचाने का प्रयास जारी है, लेकिन क्या यह नाकाफी प्रयास घरघोड़ा की प्यास बुझा पाएंगे?

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