Jashpur News Human-Wildlife Conflict : गौरीशंकर गुप्ता, जशपुर। जशपुर जिले के पत्थलगांव वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भद्रापारा गांव में बुधवार की रात हाथियों के एक दल ने जमकर उत्पात मचाया। 11 हाथियों के इस झुंड ने न केवल ग्रामीणों के घरों को निशाना बनाया, बल्कि खेतों में खड़ी तैयार फसलों को भी पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। रात के अंधेरे में हुए इस हमले से पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल रहा और ग्रामीण दहशत के साये में दुबके रहे। हाथियों के इस दल ने गांव के तीन मकानों को भारी क्षति पहुँचाई है, जिससे कड़कड़ाती ठंड में कई परिवार बेघर होने की कगार पर पहुँच गए हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हाथियों का यह दल भोजन और पानी की तलाश में जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्र की ओर बढ़ आया था। गांव के बाहरी हिस्से में लगी धान और तिल की फसलों को देख हाथियों ने खेतों पर धावा बोल दिया। भारी भरकम शरीर वाले इन हाथियों ने भागते हुए खेतों को पूरी तरह से रौंद दिया, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत मिट्टी में मिल गई। इसी दौरान हाथियों के रास्ते में आए तीन घरों की दीवारें और छतें उनके प्रहार से ढह गईं। गनीमत रही कि हाथियों की आहट सुनकर ग्रामीण समय रहते सुरक्षित स्थानों पर चले गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
घटना के दौरान ग्रामीणों ने शोर मचाकर और मशालें जलाकर हाथियों को खदेड़ने की कोशिश की, लेकिन विशाल दल के सामने उनकी हर कोशिश बेअसर साबित हुई। सुबह जब उजाला हुआ, तो गांव का नजारा किसी तबाही के मंजर जैसा था। टूटे हुए घर और रौंदे गए खेत किसानों की लाचारी की कहानी बयां कर रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि एक घर की दीवार पूरी तरह गिर चुकी है, जबकि अन्य घरों के दरवाजे और खिड़कियां क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस घटना ने एक बार फिर वन विभाग की गश्ती और सुरक्षा दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जंगलों में चारा और पानी की कमी होने के कारण हाथी अक्सर रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। विभाग ने भद्रापारा और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, वन विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे जंगल के सीमावर्ती खेतों में ऐसी फसलें न लगाएं जो हाथियों को आकर्षित करती हों। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते सूचना देने के बावजूद विभाग की ओर से ठोस सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए जाते।
इस घटना के बाद अब स्थानीय ग्रामीण संगठनों ने वन विभाग से उचित मुआवजे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की है। जशपुर जिले में बढ़ता मानव-हाथी संघर्ष अब एक गंभीर समस्या बन चुका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से हाथियों की आवाजाही पर डिजिटल ट्रैकिंग और सोलर फेंसिंग जैसी व्यवस्था करने की अपील की है ताकि जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।











