Raipur Fake Call Center Raid : रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर अब साइबर अपराधियों के लिए नया ‘जामताड़ा’ बनती जा रही है। रायपुर पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो शहर के बीचों-बीच फर्जी कॉल सेंटर चलाकर अमेरिका (USA) और यूरोप के नागरिकों को करोड़ों की चपत लगा रहा था। गंज और राजेंद्र नगर थाना क्षेत्रों में संचालित हो रहे इन सेंटरों पर पुलिस की छापेमारी ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है।
अमेरिकी समय के अनुसार चलता था ‘डेथ शिफ्ट’ का खेल
डीसीपी सेंट्रल जोन उमेश गुप्ता ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि ये ठग बेहद शातिर तरीके से काम करते थे:
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वर्किंग ऑवर्स: ठगी का यह काला कारोबार शाम 7:30 बजे शुरू होता था और पूरी रात चलता था। चूंकि उस समय अमेरिका में दिन होता है, इसलिए आरोपी वहां के नागरिकों को आसानी से शिकार बनाते थे।
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अमेज़न और एप्पल के नाम पर खेल: आरोपी खुद को अमेजॉन और एप्पल जैसी बड़ी कंपनियों के कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताते थे।
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गूगल सर्च मैनिपुलेशन: शातिर ठगों ने अपने फर्जी नंबरों को गूगल सर्च में सबसे ऊपर रैंक करा रखा था। जब अमेरिकी नागरिक तकनीकी मदद या रिफंड के लिए इन नंबरों पर कॉल करते, तो ये उन्हें अपने जाल में फंसा लेते थे।

लोन का झांसा और 20 हजार की सैलरी
जांच में सामने आया है कि ये सेंटर लोन दिलाने के नाम पर भी विदेशी नागरिकों को ठगते थे।
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बाहरी राज्यों का कनेक्शन: पकड़े गए 40 से अधिक आरोपी गुजरात, बिहार और उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के निवासी हैं।
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हायरिंग: इन युवाओं को 15 से 20 हजार रुपये की फिक्स्ड सैलरी पर ठगी के काम में लगाया गया था।
भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जप्त
पुलिस की रेड में ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले हाई-टेक उपकरणों का जखीरा मिला है:
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20 लैपटॉप
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50 डेस्कटॉप (कंप्यूटर)
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50 मोबाइल फोन
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अन्य नेटवर्किंग उपकरण और विदेशी नागरिकों के डेटा रिकॉर्ड।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
हिरासत में लिए गए 40 से अधिक लोगों से पुलिस सघन पूछताछ कर रही है। पुलिस अब इस गिरोह के ‘मास्टरमाइंड’ तक पहुँचने की कोशिश कर रही है, जिसके तार विदेशों में बैठे मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट से जुड़े होने की आशंका है। यह भी जांच की जा रही है कि विदेशी मुद्रा (डॉलर) को भारतीय रुपयों में बदलने के लिए किन माध्यमों का उपयोग किया गया।











