Sabalgarh Municipal Council Controversy : भोपाल/सबलगढ़। मुरैना जिले की सबलगढ़ नगर पालिका में इन दिनों अजीबोगरीब राजनीतिक स्थिति बनी हुई है। यहाँ की परिषद के 18 में से 17 पार्षदों ने तीन माह पहले ही अध्यक्ष सोनेराम धाकड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद अध्यक्ष महोदय अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। न्याय की उम्मीद में अब ये पार्षद राजधानी भोपाल की सड़कों और मंत्रियों के बंगलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
कैलाश विजयवर्गीय से लगाई गुहार: “विकास ठप्प, घर से चल रही सरकार”
मंगलवार, 24 मार्च 2026 को सबलगढ़ के पार्षदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय के निवास पर उनसे मुलाकात की। पार्षदों ने आरोप लगाया कि:
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मनमानी का आरोप: अध्यक्ष नगर पालिका को कार्यालय के बजाय अपने घर से संचालित कर रहे हैं।
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कागजी विकास: कार्यकाल के दौरान विकास कार्य केवल फाइलों में हुए हैं, धरातल पर स्थिति शून्य है।
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ठप्प हुआ शहर: अविश्वास की स्थिति के कारण नगर के सभी महत्वपूर्ण विकास कार्य रुके पड़े हैं।
अविश्वास प्रस्ताव का गणित: भाजपा के अपने भी खिलाफ
उल्लेखनीय है कि 17 दिसंबर 2025 को ही 18 वार्डों वाली इस नगर पालिका के 17 पार्षदों ने लामबंद होकर कलेक्टर के माध्यम से अविश्वास प्रस्ताव शासन को भेजा था।
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दलों का अनूठा संगम: अध्यक्ष सोनेराम धाकड़ के खिलाफ सत्तारूढ़ भाजपा के 4 पार्षदों सहित कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों ने हाथ मिलाया है।
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रिकॉल का कानून बेअसर: नेता प्रतिपक्ष सोनू जादौन फौजी का कहना है कि हमने धारा 47 (अल्फा) के तहत अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग किया है, लेकिन शासन स्तर पर इसे लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है।
प्रतिनिधिमंडल में ये पार्षद रहे शामिल
भोपाल पहुंचे दल में नगर पालिका उपाध्यक्ष ललिता-मनोज प्रताप, नेता प्रतिपक्ष सोनू जादौन, राकेश शिवहरे, श्रीपत प्रजापति, रामजीलाल कुशवाहा, विमला देवी, जनक श्री, शीला प्रजापति, रचना अशरफ, रामदीन खटीक, मोहन पचौरी, गुंजा-लक्ष्मण, कैलाशी भगत और कल्लू श्रीवास जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन जनप्रतिनिधियों ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी संगठन के पदाधिकारियों से मिलकर अध्यक्ष को तत्काल हटाने की मांग की है।
संवैधानिक संकट या प्रशासनिक ढिलाई?
मजेदार बात यह है कि ‘रिकॉल’ (वापस बुलाने का अधिकार) जैसे कड़े कानूनों के बावजूद, जहाँ 95% पार्षद एक स्वर में विरोध कर रहे हैं, वहां अध्यक्ष का पद पर बने रहना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। पार्षदों का सवाल सीधा है— “जब जनता के चुने हुए 17 प्रतिनिधि एक व्यक्ति को नहीं हटा पा रहे, तो आम जनता की सुनवाई कैसे होगी?”











