Barwani Gangaur Festival 2026 : बड़वानी। निमाड़ अंचल का सुप्रसिद्ध और लोक संस्कृति का परिचायक गणगौर पर्व शनिवार से बड़वानी में हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया। चैत्र शुक्ल पक्ष की तीज के पावन अवसर पर जैसे ही ‘माता की बाड़ी’ के पट खुले, पूरा शहर ‘माताजी रा गीत’ और जयकारों से गुंजायमान हो उठा। अलसुबह 5 बजे से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाड़ी पूजन के लिए कतारों में नजर आए।
सिर पर रथ और मन में अटूट विश्वास
बाड़ी बोने वाले स्थानों पर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद श्रद्धालु माता रणुबाई और धनीयर राजा के स्वरूप जवारों से भरे रथों को अपने सिर पर रखकर बाजे-गाजे के साथ अपने घरों की ओर निकले। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने माता के रथों का पाद प्रक्षालन (पैर धोना) किया और आशीर्वाद लिया। कई स्थानों पर माताओं के ‘रमने’ (भक्ति भाव में झूमने) का दौर भी चला, जहाँ श्रद्धालुओं ने अपनी मन्नतें मांगीं।
दो दिनों तक घर-घर होगी सेवा
शनिवार दोपहर तक श्रद्धालुओं ने माता के रथों को अपने घरों में स्थापित किया। अब आगामी दो-तीन दिनों तक घरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और माता की सेवा का दौर चलेगा। निमाड़ी संस्कृति के अनुसार, इन दिनों में बेटियों और बहुओं का विशेष उत्साह देखने को मिलता है, जो पारंपरिक गीतों के माध्यम से माता की आराधना करती हैं।
कल ‘पानी पिलाने’ झमलिया गार्डन पहुँचेंगे श्रद्धालु
उत्सव के अगले चरणों की जानकारी देते हुए बताया गया कि:
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रविवार: श्रद्धालु माता के रथों को लेकर ‘पानी पिलाने’ के लिए झमलिया गार्डन पहुँचेंगे। शाम को शहर भ्रमण कराया जाएगा और राम बाजार में रथों को ‘बोड़ाया’ (विश्राम) जाएगा।
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मंगलवार: अत्यंत भावुक क्षणों के साथ माता की विदाई (विसर्जन) की जाएगी।
निमाड़ का सबसे बड़ा लोकपर्व
रानीपुरा निवासी प्रणय भट ने बताया कि निमाड़ में गणगौर पर्व दिवाली और होली से भी बढ़कर माना जाता है। शहर में तीन से चार प्रमुख स्थानों पर माता की बाड़ी लगाई गई है, जहाँ सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। रात भर भजन-मंडली द्वारा माता के जस गाए जाएंगे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहेगा।











