निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : असम की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है। नगांव से लोकसभा सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने अचानक कांग्रेस से इस्तीफा देकर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।
उनका यह कदम सिर्फ एक इस्तीफा नहीं, बल्कि चुनावी समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
दशकों पुराना रिश्ता टूटा
प्रद्युत बोरदोलोई का कांग्रेस से जुड़ाव काफी पुराना रहा है। उन्होंने कम उम्र में छात्र राजनीति से अपने सफर की शुरुआत की थी।
1998 में विधायक बनने के बाद उन्होंने लंबा राजनीतिक सफर तय किया और तरुण गोगोई सरकार में करीब 15 वर्षों तक मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई।2019 में नगांव लोकसभा सीट जीतने के बाद उन्हें ऊपरी असम में कांग्रेस का मजबूत स्तंभ माना जाता था।
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इस्तीफे के पीछे नाराजगी की वजह
बताया जा रहा है कि बोरदोलोई का यह फैसला अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही नाराजगी का परिणाम है।उन्होंने पार्टी नेतृत्व को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर गलत तत्वों को संरक्षण दिया जा रहा है। उनका इशारा एक स्थानीय विधायक की ओर था, जिन पर उन्होंने गंभीर आरोप लगाए।उनके अनुसार, पंचायत चुनाव के दौरान उनके साथ हुई घटना और उसके बाद पार्टी की प्रतिक्रिया ने उन्हें आहत किया।
क्या बीजेपी में शामिल होंगे?
बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल उनके अगले कदम को लेकर है। हालांकि उन्होंने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में उनके बीजेपी में शामिल होने की चर्चाएं तेज हैं।सूत्रों के मुताबिक, उन्हें सत्ताधारी दल की ओर से प्रस्ताव भी मिला है।
चुनावी समीकरणों पर असर
यदि प्रद्युत बोरदोलोई बीजेपी में शामिल होते हैं, तो नगांव और आसपास के क्षेत्रों में चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।उनकी मजबूत पकड़ और जनाधार कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।
असम का आगामी चुनाव अब और दिलचस्प हो गया है, जहां हर राजनीतिक कदम का सीधा असर परिणामों पर पड़ सकता है।











