Chhattisgarh DGP Appointment : छत्तीसगढ़ में पूर्णकालिक DGP की नियुक्ति में देरी पर UPSC सख्त: मुख्य सचिव को नोटिस भेज माँगा स्पष्टीकरण

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Chhattisgarh DGP Appointment : रायपुर। छत्तीसगढ़ में पुलिस प्रमुख (DGP) के पद पर लंबे समय से चले आ रहे असमंजस और ‘प्रभारी’ व्यवस्था ने अब कानूनी रूप ले लिया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील को एक अत्यंत सख्त पत्र भेजकर यह स्पष्ट करने को कहा है कि राज्य में अब तक पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति क्यों नहीं की गई है। आयोग ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

UPSC के पत्र और सुप्रीम कोर्ट की फटकार

UPSC के अवर सचिव दीपक शॉ द्वारा भेजे गए पत्र में उल्लेख है कि आयोग ने 13 मई 2025 को ही योग्य अधिकारियों का पैनल छत्तीसगढ़ सरकार को भेज दिया था। नियमानुसार, इस पैनल से किसी एक अधिकारी को तत्काल ‘पूर्णकालिक’ डीजीपी के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए था। पत्र में सुप्रीम कोर्ट के 3 जुलाई 2018 के आदेश का हवाला देते हुए आयोग ने पूछा है कि आखिर अब तक उस आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ? साथ ही, विलंब के लिए ठोस और तर्कसंगत कारण बताने को कहा गया है।

क्यों फंसी है नियुक्ति की प्रक्रिया?

छत्तीसगढ़ सरकार ने यूपीएससी द्वारा भेजे गए पैनल के आधार पर अरुण देव गौतम को जिम्मेदारी तो दी, लेकिन उन्हें ‘पूर्णकालिक’ डीजीपी बनाने के बजाय ‘प्रभारी’ (In-charge) डीजीपी के रूप में नियुक्त किया। सुप्रीम कोर्ट के ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार’ मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, किसी भी राज्य में प्रभारी डीजीपी की व्यवस्था को पूरी तरह से अवैध माना गया है और यह परंपरा अस्वीकार्य है।

अधिकारियों पर लटकी अवमानना की तलवार

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 5 फरवरी 2026 को ‘टी धंगोपल राव बनाम यूपीएससी’ मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि नियुक्ति में अनावश्यक देरी होती है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। कोर्ट की यह चेतावनी अब छत्तीसगढ़ सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले अरुण देव गौतम को पूर्णकालिक डीजीपी के रूप में नियमित नहीं करती है या संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर पाती है, तो मुख्य सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों पर अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई हो सकती है।

राज्य के प्रशासनिक गलियारों में इस नोटिस को एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि राज्य सरकार अरुण देव गौतम को पूर्णकालिक नियुक्ति प्रदान कर इस विवाद को समाप्त करती है, या फिर आयोग को कोई ऐसा कारण बताती है जिसे अदालत स्वीकार करे।

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