निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : पूरी दुनिया में ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है और आने वाले समय में ड्राइवर-रहित गाड़ियां आम हो सकती हैं। इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए Uber ने अबू धाबी के यास आइलैंड पर ऑटोनॉमस यानी बिना ड्राइवर वाली राइड सर्विस शुरू की है।कंपनी का कहना है कि यह पहल ऑटोनॉमस मोबिलिटी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ऐसे बुक होगी ड्राइवर-रहित Uber
बिना ड्राइवर वाली Uber बुक करने का तरीका सामान्य Uber राइड जैसा ही है।यूजर को ऐप खोलकर अपनी मंजिल दर्ज करनी होती है। इसके बाद UberX, XL और Black के साथ एक नया विकल्प “Autonomous” दिखाई देता है।
हालांकि फिलहाल यह विकल्प सिर्फ तय किए गए ऑपरेशनल ज़ोन में ही उपलब्ध है। विकल्प चुनने पर ऐप पास की ऑटोनॉमस कार को ढूंढकर राइड मैच कर देता है।
20 सेंसर और हाईटेक सिस्टम से चलती है कार
यह ड्राइवरलेस कार लगभग 20 आधुनिक सेंसर से लैस है, जिनमें कैमरे और LiDAR तकनीक शामिल है।ये सेंसर लगातार आसपास के माहौल को स्कैन करते रहते हैं, जिससे कार सुरक्षित तरीके से सड़क पर चल पाती है।सुरक्षा के लिए ड्राइवर सीट को कवर किया गया है ताकि कोई छेड़छाड़ न कर सके।
यात्रा शुरू करने से पहले सीट बेल्ट जरूरी
कार में बैठने के बाद यात्रियों के लिए सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य होता है। इसके बाद यात्रा ऐप या कार की टचस्क्रीन के जरिए शुरू की जा सकती है।Uber के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर सचिन कंसल के मुताबिक पहली बार राइड करने वाले यात्रियों को थोड़ा डर लग सकता है, लेकिन सिस्टम यात्रा शुरू करने से पहले सभी सुरक्षा जांच पूरी करता है।
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AI सिस्टम लगातार सीखता रहता है
Uber की पार्टनर कंपनी WeRide इस सिस्टम को लगातार बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग शहरों से डेटा इकट्ठा करती है।इस डेटा के जरिए कार का ड्राइविंग पैटर्न समय के साथ और सुरक्षित और स्मार्ट बनाया जाता है।
यात्रियों के लिए खास सुरक्षा फीचर्स
अगर यात्रा के दौरान किसी यात्री को परेशानी होती है तो ऐप और कार में सपोर्ट बटन दिया गया है।इसे दबाने पर यात्री सीधे Uber की सपोर्ट टीम से जुड़ सकता है। जरूरत पड़ने पर कार को सुरक्षित स्थान पर रोक भी दिया जाता है।
विकासशील देशों में बड़ी चुनौती
हालांकि यह तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन इसे बड़े पैमाने पर लागू करना अभी भी चुनौतीपूर्ण है।किसी भी देश में इस सेवा को शुरू करने से पहले लंबे समय तक टेस्टिंग और सुरक्षा जांच जरूरी होती है।अबू धाबी के यास आइलैंड पर शुरू हुआ यह पायलट प्रोजेक्ट दिखाता है कि आने वाले समय में ट्रांसपोर्ट का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।











