निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के लखनादौन नगर परिषद में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकानों के आवंटन में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने जांच के बाद नगर परिषद अध्यक्ष मीना बलराम गोल्हानी समेत 23 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
आरोप है कि इन लोगों ने नियमों को दरकिनार करते हुए दुकानों का आवंटन किया और प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरतीं।
सरकारी खजाने को 83 लाख का नुकसान
जानकारी के मुताबिक नगर परिषद ने चट्टी से बस स्टैंड मार्ग पर 75 दुकानों का निर्माण कराया था और उनकी नीलामी की गई थी। नियमों के अनुसार सफल बोलीदाताओं को 21 दिनों के भीतर कुल राशि का 25 प्रतिशत और 120 दिनों के अंदर पूरी राशि जमा करनी थी।
लेकिन जांच में सामने आया कि 2020 से 2024 के बीच कई दुकानदारों को बिना पूरी राशि जमा किए और बिना किसी वैध अनुबंध के ही दुकानों का कब्जा दे दिया गया। इस गड़बड़ी के कारण सरकारी खजाने को करीब 83 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
फर्जी हस्ताक्षर का भी आरोप
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 32 दुकानों में से 13 दुकानदारों ने करीब 79.82 लाख रुपये की राशि जमा नहीं की है। इसके अलावा नगर परिषद करीब 2.88 लाख रुपये का किराया भी वसूल नहीं कर सकी।
मामले में एक और बड़ा खुलासा तब हुआ जब नगर परिषद के पूर्व पार्षद प्रदीप सिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि पीआईसी के तीन सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर खुद नगर परिषद अध्यक्ष मीना बलराम गोल्हानी ने किए थे।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर सियासत तेज
इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 409 और 120-बी के तहत केस दर्ज किया गया है। मामले में नगर परिषद अध्यक्ष समेत 23 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
वहीं इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विक्रम चौधरी ने इसे सत्ता के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष उदाहरण बताते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।
बताया जा रहा है कि यह जांच जबलपुर निवासी रविंद्र सिंह आनंद की शिकायत के बाद शुरू हुई थी और फिलहाल मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।











