Chhattisgarh Liquor Scam Bail : बिलासपुर/रायपुर (03 मार्च 2026): बिलासपुर हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के आबकारी घोटाले के आरोपियों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने मंगलवार को पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर, नितेश पुरोहित, यश पुरोहित और दीपेंद्र चावला की जमानत याचिकाएं स्वीकार कर ली हैं। लगभग 22 महीनों से जेल में बंद इन आरोपियों के पक्ष में अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा और शशांक मिश्रा ने पैरवी की थी।
सुप्रीम कोर्ट से मिली थी ‘लिबर्टी’ उल्लेखनीय है कि पूर्व में सत्र न्यायालय और हाईकोर्ट ने इनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत तो नहीं दी थी, लेकिन पांच महीने बाद दोबारा हाईकोर्ट में आवेदन करने की स्वतंत्रता (लिबर्टी) दी थी। इसी के आधार पर दोबारा लगाई गई याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया।
क्यों जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे टुटेजा और ढेबर? भले ही आबकारी मामले में जमानत मिल गई हो, लेकिन पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने उन्हें 550 करोड़ रुपये के डीएमएफ (DMF) घोटाले में भी आरोपी बनाया है। उस मामले में जमानत न होने के कारण ये दोनों फिलहाल जेल में ही रहेंगे। वहीं, नितेश पुरोहित, दीपेंद्र चावला और यश पुरोहित के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है 3200 करोड़ का शराब घोटाला? प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 2019 से 2023 के बीच शराब नीति बदलकर एक बड़ा सिंडिकेट बनाया गया था। आरोप है कि नोएडा की एक कंपनी के माध्यम से नकली होलोग्राम और सील बनवाए गए। इन नकली होलोग्राम लगी बोतलों को सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से बिकवाया गया, जिससे शासन को मिलने वाला एक्साइज टैक्स पूरी तरह से चोरी किया गया। इस घोटाले में पूर्व मंत्रियों, बड़े अधिकारियों और रसूखदार कारोबारियों की संलिप्तता के आरोप हैं।











