NCERT की किताब में अदालतों के भ्रष्टाचार का जिक्र, भड़के CJI बोले- संस्था को नहीं होने देंगे बदनाम

Rahul Goshwami

निशानेबाज़ न्यूज़ डेस्क : चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कक्षा 8 की NCERT सोशल साइंस पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े कंटेंट पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे किसी को भी न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे। मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया जा सकता है।CJI ने टिप्पणी की कि यह “सोची-समझी कार्रवाई” प्रतीत होती है और इससे निपटने का तरीका उन्हें पता है।

क्या है विवाद की जड़?

NCERT की नई संशोधित पुस्तक में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक से एक अध्याय जोड़ा गया है। इसमें न्याय व्यवस्था की चुनौतियों, लंबित मामलों और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों का उल्लेख है।

पुस्तक में देशभर की अदालतों में कुल लगभग 5.33 करोड़ (53,321,000) लंबित मामलों का जिक्र किया गया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट में करीब 81,000, हाई कोर्ट में 62.4 लाख और जिला व अधीनस्थ अदालतों में लगभग 4.7 करोड़ मामलों का विवरण दिया गया है।अध्याय में यह भी लिखा गया है कि आम लोगों, खासकर गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए न्याय तक पहुंच आसान नहीं है।

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शिकायतों के आंकड़ों का हवाला

किताब में केंद्रीय लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) के जरिए न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया का उल्लेख है। 2017 से 2021 के बीच 1,600 से अधिक शिकायतें मिलने की बात कही गई है।

वहीं, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 13 फरवरी 2026 को लोकसभा में बताया कि पिछले दस वर्षों में CJI कार्यालय को मौजूदा जजों के खिलाफ 8,630 शिकायतें प्राप्त हुईं। 2016 से 2025 के बीच शिकायतों की संख्या 8,360 दर्ज की गई। वर्षवार आंकड़ों में 2019, 2022, 2024 और 2025 में शिकायतों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही।

राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज

इस मुद्दे पर सांसद कपिल सिब्बल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 8वीं कक्षा के छात्रों को ‘भ्रष्ट ज्यूडिशियरी सिस्टम’ के बारे में पढ़ाया जा रहा है। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और NCERT अपने कंटेंट पर क्या स्पष्टीकरण देता है। फिलहाल, न्यायपालिका की छवि और शैक्षणिक पाठ्यक्रम की पारदर्शिता को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।

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