निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : हार्ट अटैक के कई कारण माने जाते हैं, लेकिन हालिया शोध यह संकेत देता है कि बार-बार और अचानक आने वाला गुस्सा दिल के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अमेरिका की प्रतिष्ठित Johns Hopkins University से जुड़ी रिसर्च के अनुसार तेज गुस्से के बाद के लगभग दो घंटों में हार्ट अटैक का जोखिम सामान्य स्थिति की तुलना में कई गुना तक बढ़ सकता है। European Heart Journal में प्रकाशित एक अध्ययन भी बताता है कि गुस्से की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ने के साथ दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जाता है।
स्ट्रेस हार्मोन से बढ़ता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार गुस्से की स्थिति में शरीर में कैटेकोलामाइंस जैसे स्ट्रेस हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं, जिससे रक्तचाप अचानक ऊंचा हो जाता है। बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है और यही स्थिति हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा सकती है। कुछ मामलों में अत्यधिक भावनात्मक तनाव “ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम” जैसी स्थिति भी पैदा कर सकता है।
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लंबे समय तक चली स्टडी में सामने आए नतीजे
Johns Hopkins Medicine द्वारा किए गए एक लंबे अध्ययन में 1,300 से अधिक पुरुषों को कई दशकों तक ट्रैक किया गया। जिन लोगों को अक्सर तेज गुस्सा आता था, उनमें दिल की बीमारी और हार्ट अटैक के मामले ज्यादा पाए गए। खास बात यह रही कि कुछ व्यक्तियों में पहले से गंभीर हृदय रोग न होने के बावजूद भी अटैक का खतरा अधिक देखा गया। इससे संकेत मिलता है कि गुस्सा भी हाई कोलेस्ट्रॉल या पारिवारिक इतिहास की तरह एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक हो सकता है।
हार्ट को सुरक्षित रखने के उपाय
विशेषज्ञ दिल की सेहत बनाए रखने के लिए भावनात्मक नियंत्रण पर जोर देते हैं।
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नियमित योग और ध्यान तनाव कम करने में मददगार हो सकते हैं।
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गुस्सा आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें और खुद को शांत करने की कोशिश करें।
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लगातार तनाव या चिड़चिड़ापन महसूस हो तो डॉक्टर या काउंसलर से सलाह लेना बेहतर रहता है।













