CG NEWS : रायपुर। कर्मचारियों ने मांगो पर प्रशासनिक अधिकारीयों के नियत एवं गैर जिम्मेदारी विभाग के मंत्रियों को गलत जानकारी देने का भी आरोप लगाया हैं, जिसके कारण ही स्वास्थ्य व्यवस्था पर बुरा असर हुआ हैं, यदि अधिकारी कार्यवाही नोटिस के बजाय मांगो में त्वरित आदेश निकालने का कार्य किये रहते तो यह स्थिति निर्मित नहीं हुआ होता.. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारी अपनी नियमितीकरण/संविलियन, ग्रेड पे सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले एक माह से हड़ताल पर डटे हुए हैं। कर्मचारियों ने साफ कहा है कि लिखित आदेश जारी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
CG NEWS : इधर प्रशासन की ओर से तुरत कार्य पर लौटने का नोटिस जारी कर दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन एनएचएम कर्मियों ने चेतावनी दी है कि वे किसी भी प्रशासनिक धमकी या कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।
CG NEWS : कर्मचारियों की प्रमुख मांगें :
1. नियमितीकरण/संविलियन एवं नौकरी की सुरक्षा
2. पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
3. ग्रेड पे निर्धारण
4. कार्य मूल्यांकन पद्धति में सुधार
5. लंबित 27% वेतन वृद्धि
6. नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण
7. अनुकंपा नियुक्ति
8. मेडिकल एवं अन्य अवकाश की सुविधा
9. स्थानांतरण नीति
10. न्यूनतम 10 लाख का चिकित्सा बीमा
CG NEWS : प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरि और प्रदेश प्रवक्ता पूरन दास ने कहा कि: “पिछले 20 वर्षों से एनएचएम कर्मचारी कम वेतन, बिना संविलियन, सामाजिक सुरक्षा और मेडिकल अवकाश के दूरस्थ ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। सरकार को हमारी मांगें माननी चाहिए, न कि नौकरी से निकालने की धमकी देनी चाहिए।”
CG NEWS : धरना स्थल पर मौजूद पुरे प्रदेश के करीब 16,000 से ज्यादा कर्मचारियों ने राज्यपाल रमेन डेका को सामूहिक इच्छा मृत्यु की अनुमति के लिए पत्र भी सौंपा है। बताया गया की विभाग के अधिकारियों की गलत जानकारी देने के कारण सरकार और कर्मचारी आमने-सामने की स्थिति निर्मित हुवा हैं, कर्मचारियों ने मांग किया कि मुख्यमंत्री को तत्काल संज्ञान में लेते मांगो में विचार किया जाना चाहिए और लोकहित को देखते हुए सभी मांगो को पूरा करना चाहिए..
CG NEWS : आम जनता पर असर
CG NEWS : लगातार हड़ताल से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। बरसात के मौसम में ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों के लोग इलाज के लिए शहरों का रुख करने को मजबूर हैं। एनएचएम कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सरकार लिखित आदेश जारी नहीं करती, तब तक हड़ताल किसी भी हाल में समाप्त नहीं होगी।









