EPS 95 Pensioners Protest Delhi : फकरे आलम खान/बचेली/रायपुर : केंद्र सरकार द्वारा बार-बार दिए जा रहे ‘मिथ्या आश्वासनों’ से क्षुब्ध होकर ईपीएस-95 पेंशनर्स ने अब निर्णायक लड़ाई का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रीय संघर्ष समिति के तत्वावधान में आगामी 9, 10 और 11 मार्च को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर के हजारों पेंशनर्स विशाल धरना प्रदर्शन करेंगे। यह निर्णय हाल ही में आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर की ज़ूम मीटिंग में लिया गया है।
12 वर्षों से महज 1000 रुपये पर गुजारा
पेंशनर्स का कहना है कि वर्ष 2013 में न्यूनतम पेंशन मात्र एक हजार रुपये निर्धारित की गई थी। आज 12 साल बीत जाने के बाद भी, आसमान छूती महंगाई के दौर में इसमें एक रुपये की भी वृद्धि नहीं की गई। इन पेंशनभोगियों ने अपनी 30-35 वर्षों की सेवा के दौरान पेंशन फंड में अपना नियमित अंशदान दिया है, फिर भी उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार से वंचित रखा जा रहा है।
नेताओं की सुविधाओं और पेंशन पर उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ राज्य अध्यक्ष एल.एम. सिद्दीकी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार उन लोगों को करोड़ों रुपये बांट रही है जिन्होंने कभी कोई अंशदान नहीं दिया, सिर्फ इसलिए ताकि ‘वोटों की फसल’ काटी जा सके। उन्होंने सवाल उठाया कि सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को दो-तीन पेंशन और बेतहाशा वेतन भत्ते दिए जाते हैं, लेकिन वृद्ध पेंशनर्स को राहत देने के लिए सरकार के पास बजट नहीं है।
देशभर से जुटेंगे हजारों बुजुर्ग
इस आंदोलन के लिए छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और पंजाब सहित लगभग सभी राज्यों से पेंशनर्स दिल्ली पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत और महासचिव वीरेंद्र सिंह राजावत लगातार राज्यों का दौरा कर पेंशनर्स को जागरूक कर रहे हैं।
श्रम मंत्री के आश्वासन पर संदेह
हाल ही में 6 फरवरी को भुवनेश्वर में केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने घोषणा की थी कि पेंशन वृद्धि का विषय उनके एजेंडे में है और इस पर शीघ्र विचार होगा। हालांकि, पेंशनर्स का कहना है कि वे पहले भी ऐसे कई आश्वासन सुन चुके हैं और अब बिना ठोस आदेश के वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।













