निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में भारतीय वायु सेना के लिए 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा।
रक्षा सौदे की लागत और निर्माण योजना
सूत्रों के अनुसार इस बड़े रक्षा सौदे की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये हो सकती है। योजना के तहत 18 विमान सीधे तैयार अवस्था में मिलेंगे, जबकि बाकी जेट्स का निर्माण भारत में किया जाएगा। स्वदेशी उत्पादन से न केवल तकनीकी क्षमता बढ़ेगी बल्कि रक्षा क्षेत्र में रोजगार और उद्योग को भी गति मिलेगी। पूरी डिलीवरी प्रक्रिया में लगभग 5 से 7 वर्ष लगने का अनुमान है।
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नौसेना की ताकत भी बढ़ेगी
बैठक में भारतीय नौसेना के लिए 6 P-8I समुद्री निगरानी विमान खरीदने का फैसला भी लिया गया। ये विमान पनडुब्बी रोधी अभियान और समुद्री निगरानी में अहम भूमिका निभाते हैं, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ मजबूत होगी।
राफेल क्यों है खास
राफेल एक अत्याधुनिक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो हवा-से-हवा और हवा-से-जमीन हमलों के साथ परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम माना जाता है। इसकी उन्नत रडार प्रणाली, लंबी दूरी की मिसाइलें और आधुनिक एवियोनिक्स इसे बेहद घातक बनाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नए राफेल शामिल होने से भारत को चीन और पाकिस्तान के खिलाफ सामरिक बढ़त मिलेगी।
मौजूदा बेड़ा और रणनीतिक महत्व
भारत के पास वर्तमान में 36 राफेल विमान हैं, जो अंबाला और हाशिमारा एयरबेस पर तैनात हैं। नए विमानों की खरीद से भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ेगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह सौदा फ्रांस के साथ रक्षा सहयोग को और गहरा करने वाला माना जा रहा है।













