नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2026-27 में खेलकूद से जुड़े क्षेत्र को नई मजबूती देने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। सरकार का फोकस खेलों को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि करियर और आर्थिक विकास के मजबूत माध्यम के रूप में विकसित करने पर है।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में खेलकूद का सामान सस्ता होगा, जिससे खिलाड़ियों, युवाओं और स्कूल-कॉलेज स्तर के खेल प्रतिभाओं को सीधा फायदा मिलेगा। इससे खास तौर पर ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के खिलाड़ियों को बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
गांव-गांव मजबूत होगा खेल इंफ्रास्ट्रक्चर
बजट 2026 में ग्रामीण भारत में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष योजना की घोषणा की गई है। इसके तहत गांवों में:
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खेल मैदानों का विकास
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प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार
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स्थानीय स्तर पर टूर्नामेंट और लीग्स का आयोजन
किया जाएगा। सरकार का मानना है कि मजबूत जमीनी ढांचा ही भविष्य के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की नींव तैयार करेगा।
खेल प्रतिभा विकास पर विशेष जोर
सरकार ने खेल प्रतिभा को निखारने के लिए एक समग्र रणनीति अपनाने का फैसला किया है। इसमें शामिल हैं:
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कोचिंग स्टाफ की प्रोफेशनल ट्रेनिंग
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खेल विज्ञान और आधुनिक तकनीक का उपयोग
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फिटनेस, न्यूट्रिशन और स्पोर्ट्स एनालिटिक्स पर फोकस
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राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का विस्तार
इन कदमों से बच्चों और युवाओं में खेल के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे खेल को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
स्वरोजगार और खेल का संगम
वित्त मंत्री ने महात्मा गांधी स्वरोजगार योजना के तहत SME सेक्टर के लिए 10,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा भी की। इससे ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और खेल उपकरण निर्माण, कोचिंग, इवेंट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुलेंगी।
वैश्विक खेल केंद्र बनने की तैयारी
भारत इस समय 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की मेज़बानी की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। ऐसे में बजट 2026 में खेल सेक्टर पर किया गया निवेश भारत को वैश्विक खेल मानचित्र पर मजबूत स्थिति दिलाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले दशक में “खेलो इंडिया” सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बने।











