New Tax Regime : नई दिल्ली: 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट 2026 को लेकर नौकरीपेशा वर्ग की उम्मीदें सातवें आसमान पर हैं। इस बार सबसे बड़ा सवाल ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) के भविष्य को लेकर उठ रहा है। सूत्रों और विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का पूरा ध्यान अब न्यू टैक्स रिजीम को ही मुख्यधारा में लाने पर है, क्योंकि लगभग 95 फीसदी टैक्सपेयर्स पहले ही इसमें शिफ्ट हो चुके हैं। हालांकि, ओल्ड रिजीम को पूरी तरह खत्म करने के बजाय, सरकार इसे धीरे-धीरे अप्रासंगिक बनाने की रणनीति अपना सकती है ताकि लोग स्वेच्छा से नए सिस्टम को अपना लें।
न्यू टैक्स रिजीम को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए वित्त मंत्री इस बार ‘स्टैंडर्ड डिडक्शन’ की सीमा को 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने का बड़ा ऐलान कर सकती हैं। फिलहाल, स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट को मिलाकर 12.75 लाख रुपये तक की सालाना सैलरी पर कोई प्रभावी टैक्स नहीं लगता है। अगर कटौती की सीमा बढ़ती है, तो यह दायरा और भी व्यापक हो जाएगा, जिससे मध्यम आय वर्ग के हाथों में खर्च के लिए अधिक पैसा बचेगा।
एक और महत्वपूर्ण बदलाव नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को लेकर संभावित है। वर्तमान में ओल्ड रिजीम में मिलने वाली NPS की अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट न्यू टैक्स रिजीम में उपलब्ध नहीं है। जानकारों का कहना है कि अगर सरकार न्यू टैक्स रिजीम में भी NPS योगदान को डिडक्शन के दायरे में लाती है, तो यह रिटायरमेंट सेविंग्स को बढ़ावा देने के साथ-साथ कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए नए सिस्टम को बेहद आकर्षक बना देगा। सरकार की कोशिश एक सरल, कम विवाद वाली और बिना किसी जटिल कटौती वाली टैक्स व्यवस्था को स्थापित करने की है।
दूसरी ओर, ओल्ड टैक्स रिजीम अभी भी उन लोगों की पसंद बना हुआ है जिन्होंने होम लोन, HRA और 80C के तहत भारी निवेश किया हुआ है। लेकिन जिस तरह से पिछले कुछ सालों में न्यू रिजीम के स्लैब में सुधार किए गए हैं, उससे स्पष्ट है कि सरकार चाहती है कि टैक्सपेयर्स जटिल निवेशों के जाल से बाहर निकलकर सीधे कम दरों पर टैक्स का भुगतान करें। 1 फरवरी का बजट यह दिशा तय कर देगा कि आने वाले समय में ओल्ड टैक्स रिजीम का अस्तित्व बना रहेगा या न्यू रिजीम ही एकमात्र विकल्प होगा।











