वॉशिंगटन: वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार ट्रंप को सौंप दिया, जो सोशल मीडिया और वैश्विक मंच पर विवाद का कारण बन गया।
नोबेल पुरस्कार के नियमों के तहत विवाद
नोबेल पुरस्कार संस्थान ने स्पष्ट किया है कि नोबेल पदक और उपाधि केवल वही व्यक्ति रख सकता है जिसे यह पुरस्कार मिला है। इसे न तो वापस लिया जा सकता है, न साझा किया जा सकता है, और न ही किसी अन्य को सौंपा जा सकता है। मचाडो ने समर्थकों से कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को अपना पदक समर्पित किया, लेकिन ट्रंप ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं दी।
The #NobelPeacePrize medal.
It measures 6.6 cm in diameter, weighs 196 grams and is struck in gold. On its face, a portrait of Alfred Nobel and on its reverse, three naked men holding around each other’s shoulders as a sign of brotherhood. A design unchanged for 120 years.
Did… pic.twitter.com/Jdjgf3Ud2A
— Nobel Peace Center (@NobelPeaceOslo) January 15, 2026
मेडल का विवरण और इतिहास
नोबेल पीस सेंटर के अनुसार, पदक का व्यास 6.6 सेंटीमीटर और वजन 196 ग्राम है, और यह सोने का बना होता है। एक तरफ अल्फ्रेड नोबेल का चित्र है, जबकि दूसरी तरफ तीन व्यक्ति कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं, जो भाईचारे का प्रतीक हैं। यह डिजाइन पिछले 120 वर्षों से अपरिवर्तित है।
Read More : इजरायल ने किया न्यूक्लियर टेस्ट! डिमोना न्यूक्लियर साइट के पास कांपी धरती, टेंशन में ईरान-यमन
इतिहास में मेडल का नीलामी
नोबेल पुरस्कार के इतिहास में कुछ उदाहरण भी हैं, जैसे दिमित्री मुरातोव का मेडल, जिसे यूक्रेन युद्ध में शरणार्थियों की मदद के लिए नीलाम किया गया था। हालांकि, नोबेल संस्थान ने स्पष्ट किया कि उपाधि किसी और को हस्तांतरित नहीं की जा सकती, भले ही मेडल का मालिक बदल जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि मचाडो का यह कदम केवल प्रतीकात्मक है, लेकिन नोबेल पुरस्कार की आधिकारिक उपाधि केवल वास्तविक विजेता तक ही सीमित रहती है।











