AICTE का बड़ा फैसला! देशभर के 58 इंजीनियरिंग कॉलेज होंगे बंद, MP के 8 कॉलेजों पर भी कार्रवाई

AICTE Engineering Colleges Closure: देश में तकनीकी शिक्षा को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। AICTE इंजीनियरिंग कॉलेज बंद करने की प्रक्रिया के तहत अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की मंजूरी दी है। इस फैसले के बाद कई राज्यों के निजी कॉलेज प्रभावित होंगे। हालांकि पहले से पढ़ रहे छात्रों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

AICTE इंजीनियरिंग कॉलेज बंद करने के पीछे सबसे बड़ी वजह लगातार घटती छात्र संख्या, योग्य शिक्षकों की कमी और तय शैक्षणिक मानकों को पूरा नहीं कर पाना बताया गया है। AICTE का कहना है कि ऐसे संस्थानों को लंबे समय तक जारी रखना शिक्षा की गुणवत्ता के लिए ठीक नहीं है।इसी कारण परिषद ने इन कॉलेजों को ‘प्रोग्रेसिव क्लोजर’ यानी चरणबद्ध तरीके से बंद करने की अनुमति दी है।

नए छात्रों का प्रवेश पूरी तरह बंद
AICTE इंजीनियरिंग कॉलेज बंद होने की प्रक्रिया के तहत इन संस्थानों में अब नए प्रथम वर्ष के छात्रों का दाखिला नहीं होगा। लेकिन जिन छात्रों ने पहले से प्रवेश लिया हुआ है, वे अपनी पढ़ाई उसी कॉलेज से पूरी कर सकेंगे। इससे वर्तमान छात्रों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर?
AICTE इंजीनियरिंग कॉलेज बंद की सूची में सबसे अधिक कॉलेज उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के हैं। दोनों राज्यों के 12-12 संस्थानों को बंद करने की मंजूरी मिली है।इसके अलावा मध्य प्रदेश के 8 कॉलेज, तेलंगाना और पंजाब के 4-4, आंध्र प्रदेश और राजस्थान के 3-3, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु के 2-2 संस्थान इस सूची में शामिल हैं। हरियाणा, ओडिशा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के एक-एक कॉलेज भी प्रभावित हुए हैं।
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निजी संस्थानों पर सबसे ज्यादा असर
AICTE इंजीनियरिंग कॉलेज बंद के फैसले से प्रभावित 58 संस्थानों में केवल तीन सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेज हैं। बाकी सभी निजी संस्थान हैं। इससे साफ है कि निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

950 से ज्यादा कोर्स भी हुए बंद
AICTE ने केवल कॉलेजों पर ही कार्रवाई नहीं की है। AICTE इंजीनियरिंग कॉलेज बंद प्रक्रिया के साथ देशभर के इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों में चल रहे 950 से अधिक कोर्स भी बंद कर दिए गए हैं। परिषद का मानना है कि कम मांग वाले और कमजोर गुणवत्ता वाले कोर्स जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।

विशेषज्ञों की क्या राय?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में छात्र केवल डिग्री नहीं बल्कि बेहतर प्लेसमेंट, आधुनिक लैब, अनुभवी शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चाहते हैं। ऐसे में जिन संस्थानों में सुविधाएं और गुणवत्ता नहीं है, वहां छात्रों का रुझान लगातार कम हो रहा है। AICTE इंजीनियरिंग कॉलेज बंद का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा का स्तर बेहतर बनाना और छात्रों को मजबूत संस्थानों तक पहुंच देना है।

आगे क्या होगा?
AICTE का मानना है कि यह फैसला भविष्य में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करेगा। कमजोर प्रदर्शन करने वाले संस्थानों की जगह बेहतर सुविधाओं वाले कॉलेजों को बढ़ावा मिलेगा। आने वाले वर्षों में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में और भी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

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