MP Employees Union Protest : भोपाल : राजधानी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे ने प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के साथ हो रहे आर्थिक अन्याय का मुद्दा उठाया। उन्होंने तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा 12 दिसंबर 2019 को जारी किए गए एक विवादास्पद आदेश को लेकर वर्तमान सरकार को भी आड़े हाथों लिया।
क्या है 2019 का ‘वेतन कटौती’ आदेश?
अशोक पांडे ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग के इस आदेश के कारण नवनियुक्त सरकारी कर्मचारियों को उनके काम के शुरुआती सालों में पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा है। इस फार्मूले के तहत:
- प्रथम वर्ष: कुल वेतन का मात्र 70% भुगतान (30% कटौती)।
- द्वितीय वर्ष: कुल वेतन का मात्र 80% भुगतान (20% कटौती)।
- तृतीय वर्ष: कुल वेतन का मात्र 90% भुगतान (10% कटौती)।
- चौथा वर्ष: नियुक्ति के 3 साल पूरे होने के बाद कर्मचारी को 100% (पूरा) वेतन मिलता है।
करोड़ों का नुकसान और शोषण का आरोप
कर्मचारी मंच का आरोप है कि कर्मचारी ड्यूटी पूरी करता है और जिम्मेदारी भी पूरी निभाता है, लेकिन सरकार उसका वेतन काटकर उसका आर्थिक शोषण कर रही है। पिछले 6 वर्षों में इस नियम की वजह से प्रदेश के हजारों नवनियुक्त कर्मचारियों को करोड़ों रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
अशोक पांडे ने मांग की है कि इस “70-80-90 प्रतिशत” के नियम को तत्काल प्रभाव से खत्म किया जाए और कर्मचारियों को उनकी नियुक्ति के पहले दिन से ही पूर्ण वेतन (100%) का लाभ दिया जाए।











