बिलासपुर : बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में नवजात की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और गायनेकोलॉजिस्ट पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं, प्रसूता की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है और उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है।
9 महीने से चल रहा था इलाज
जानकारी के अनुसार, विनोबा नगर निवासी पीहू अग्रवाल (पति भास्कर नालोटिया अग्रवाल) पिछले 9 महीनों से अपोलो अस्पताल में नियमित इलाज करा रही थीं। दो दिन पहले उन्हें प्रसव के लिए भर्ती किया गया था। परिजनों का आरोप है कि महिला की हालत बिगड़ने के बावजूद डॉक्टरों ने समय रहते ऑपरेशन नहीं किया।
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डॉक्टरों की सलाह के बावजूद नहीं हुआ ऑपरेशन
परिजनों के अनुसार, महिला को अत्यधिक खांसी और कमजोरी की शिकायत थी। ओपीडी में डॉक्टर दीपक अग्रवाल ने ऑपरेशन की सलाह दी, लेकिन गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. रश्मि शर्मा ने सर्जरी नहीं की। देर रात जब पेट में हलचल बंद हुई, तब दोबारा जांच कराई गई, जिसमें नवजात की गर्भ में ही मौत की पुष्टि हुई।
सोनोग्राफी रिपोर्ट को लेकर भी संदेह
परिजनों का कहना है कि सुबह की सोनोग्राफी में बच्चे के गले में तीन बार नाल लिपटी बताई गई थी, जबकि रात की रिपोर्ट में सिर्फ एक बार नाल फंसी होने की बात कही गई। इससे अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मेडिकल लाइसेंस रद्द करने की मांग
परिजनों ने नवजात की मौत को हत्या करार देते हुए संबंधित डॉक्टर का मेडिकल लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है। वहीं, मीडिया को कवरेज से रोकने पर भी अस्पताल प्रबंधन की आलोचना हो रही है।
प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर जांच टीम गठित की जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।











