निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में रहे, जिन्होंने गठबंधन सरकार के दबावों के बावजूद दूरदर्शी और साहसिक फैसले लिए। वे देश के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। उनके निर्णय आज भी भारत की राजनीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर गहरी छाप छोड़ते हैं।
पोखरण-2 से परमाणु शक्ति बना भारत
मई 1998 में राजस्थान के पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षण (ऑपरेशन शक्ति) ने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना दिया। अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद लिया गया यह फैसला भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बना।
सड़क और संचार क्रांति
अटल सरकार ने स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के जरिए देश को सड़कों से जोड़ा। वहीं 1999 की नई टेलीकॉम नीति ने मोबाइल फोन को आम आदमी की पहुंच में ला दिया।
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शिक्षा और आर्थिक सुधार
सर्व शिक्षा अभियान के जरिए 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया गया। साथ ही विनिवेश मंत्रालय बनाकर सरकारी कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई, जिससे आर्थिक सुधारों को गति मिली।
शांति की पहल और सुरक्षा के कड़े फैसले
पाकिस्तान के साथ दिल्ली-लाहौर बस सेवा शुरू कर शांति का संदेश दिया, वहीं संसद पर हमले के बाद आतंकवाद से निपटने के लिए पोटा कानून लाया गया।
संवैधानिक और सामाजिक फैसले
संविधान समीक्षा आयोग का गठन और जातिवार जनगणना पर रोक जैसे फैसले आज भी बहस का विषय हैं।
गुजरात दंगे और ‘राजधर्म’
2002 के गुजरात दंगों के दौरान वाजपेयी का ‘राजधर्म’ वाला बयान ऐतिहासिक माना जाता है, हालांकि इसे लेकर उनकी आलोचना भी हुई।
अटल बिहारी वाजपेयी के फैसले बताते हैं कि वे सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि राष्ट्र को दिशा देने वाले दूरदर्शी नेता थे।











